मामला पारा शिक्षकों की सेवा नियमित करने का, हाइकोर्ट ने सरकार से पूछा
रांची : झारखंड हाइकोर्ट में मंगलवार को पारा शिक्षकों की सेवा नियमित
करने व सरकार की नियमितीकरण नियमावली को लेकर दायर दर्जनों याचिकाअों पर
सुनवाई हुई.
चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस व जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने
सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कोर्ट के पिछले आदेश के अनुसार जवाब दाखिल
करने को कहा. राज्य सरकार जवाब दाखिल नहीं कर पायी. पिछली सुनवाई के दाैरान
कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि पारा शिक्षकों को नियमित वेतन देने पर
कितना वित्तीय बोझ पड़ेगा. वित्तीय बोझ का आकलन करते हुए शपथ पत्र दायर
करने का निर्देश दिया था. खंडपीठ ने राज्य सरकार को शपथ पत्र दायर कर
वित्तीय बोझ की जानकारी देने का निर्देश दिया. मामले की अगली सुनवाई के लिए
खंडपीठ ने 12 सितंबर की तिथि निर्धारित की.
इससे पूर्व केंद्र सरकार की अोर से अधिवक्ता राजीव सिन्हा ने खंडपीठ
को बताया कि इसी तरह के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है.
बिहार सरकार ने पटना हाइकोर्ट के आदेश को चुनाैती दी है. हाइकोर्ट ने
समान काम के लिए समान वेतन देने का आदेश दिया था. वहीं राज्य सरकार की अोर
से अपर महाधिवक्ता जय प्रकाश ने खंडपीठ को बताया कि पूर्व के आदेश के आलोक
में जवाब तैयार नहीं हो पाया है. उन्होंने समय देने का आग्रह किया.
उल्लेखनीय है कि प्रार्थी सुनील कुमार यादव, नवनीत कुमार, रमेश कुमार
यादव व अन्य की अोर से अलग-अलग याचिकाएं दायर की गयी है. लगभग 800 शिक्षकों
ने हाइकोर्ट की शरण ली है. याचिका में कहा गया है कि वे लंबे समय से पारा
शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं. उनकी सेवा नियमित की जाये तथा समान काम के
लिए समान वेतन दिया जाये. साथ ही प्रार्थियों ने वर्ष 2015 में राज्य सरकार
द्वारा लागू नियमितीकरण नियमावली को भी चुनाैती दी है.
स्कूलों में 67 हजार पारा शिक्षक कार्यरत
सर्व शिक्षा अभियान के तहत राज्य के प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में
लगभग 80 हजार पारा शिक्षकों की नियुक्ति ग्राम शिक्षा समिति द्वारा की गयी
थी. पारा शिक्षक संविदा पर कार्यरत हैं. वर्तमान में 67 हजार पारा शिक्षक
विद्यालयों में अपनी सेवा दे रहे हैं. पारा शिक्षकों को प्रतिमाह मानदेय का
भुगतान किया जाता है. वर्तमान में कई माह का मानदेय भी बकाया है.