राज्य भर के हजारों पारा शिक्षक पूर्वनियोजित कार्यक्रम के तहत शिक्षा
मंत्री के आवास का घेराव करने शनिवार को विधानसभा मैदान में इकट्ठा हुए।
यहां लगभग छह घंटे तक डटे पारा शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी
की। लेकिन जिला प्रशासन ने इन्हें विधानसभा मैदान से आगे नहीं बढ़ने दिया।
प्रदर्शन के चार घंटे बाद रांची सदर की एसडीओ अंजलि यादव ने शिक्षक के
प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री समेत शिक्षा
मंत्री और शिक्षा सचिव रांची से बाहर हैं। दो दिन बाद उन्होंने उनकी वार्ता
कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद आंदोलनरत शिक्षक संघ ने करीब चार बजे
अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की।
सीएम के प्रधान सचिव से हुई थी वार्ता
इससे पहले शुक्रवार देर रात शिक्षक संघ के एक प्रतिनिधिमंडल की वार्ता
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सुनील वर्णवाल से भी हुई थी। वर्णवाल की ओर से
संघ की कुछ मांगों पर सहमति भी बनी थी। लेकिन वार्ता के दौरान अन्य संगठन
के कार्याकर्ता के मौजूद नहीं होने के कारण आखिरी सहमति नहीं बन पाई। राज्य
के अलग-अलग हिस्से से शिक्षक शुक्रवार रात से ही विधानसभा मैदान में जमा
होने लगे थे।
पुलिस रही मुस्तैद
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मौके पर वज्र वाहन, वाटर कैनन,
एंबुलेंस के साथ-साथ सुरक्षा के अन्य उपाय किये गए थे। बिरसा चौक से
विधानसभा के मुख्य गेट तक सैकड़ों की संख्या में महिला और पुलिस बल के जवान
को तैनात किया गया था। सिटी एसपी अमन कुमार और ट्रैफिक एसपी संजय रंजन सिंह
खुद पूरी स्थिति पर नजर रखे हुए थे। इनके अलावा एडीएम (विधी व्यवस्था),
सीसीएआर डीएसपी और सदर डीएसपी भी मौके पर थे।
नहीं करेंगे वीक्षण कार्य
शिक्षकों ने घोषणा की है कि अब ये सीधा मुख्यमंत्री से मिलेंगे। अगर 15
दिनों के अंदर उनकी वार्ता मुख्यमंत्री से नहीं कराई गई तो राज्य भर के
पारा शिक्षक पांच अप्रैल से सीएम आवास का अनिश्चितकालीन घेराव करेंगे। साथ
ही 12 मार्च से मैट्रिक परीक्षा में वीक्षण कार्य का बहिष्कार करेंगे। इसके
अलावा डीएलओ के कार्य को भी नहीं करेंगे।
इन मांगों के लिए आंदोलन कर रहे हैं पारा शिक्षक
पारा शिक्षकों को समायोजित करते हुए समान काम का समान वेतन के सुप्रीम
कोर्ट के फैसले को झारखंड में भी लागू किया जाए। शिक्षक पात्रता परीक्षा
(टेट) की परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थियों को शिक्षक के पद पर सीधे नियुक्त
किया जाये। टेट सर्टिफिकेट की अवधि का विस्तार किया जाये। स्कूलों के
समायोजन की जो प्रक्रिया है उसे रोका जाये। पारा शिक्षकों के लिए पारा
शिक्षक कल्याण कोष का गठन किया जाये और पारा शिक्षकों को इपीएफ से जोड़ा
जाये। पारा शिक्षकों को पहले की तरह मुफ्त में डीएलएड की ट्रेनिंग दी जाये।
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