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हाई कोर्ट के आदेश के बाद वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी

शिक्षा सचिव को जानकारी दी गई है
सभी स्कूलों में यह व्यवस्था लागू है
कतरासके बीके राय हाई स्कूल में जिस तरह अधिकारी कक्षाएं ले रहे हैं, वैसी ही व्यवस्था पूरे राज्य में लागू की जाएगी। शिक्षा सचिव आराधना पटनायक ने इसकी सराहना की है।
उन्होंने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि बिना शिक्षकों वाले स्कूलों में बीके राय हाई स्कूल का मॉडल अपनाया जाए। 13 मई को हुई समीक्षा बैठक में शिक्षा सचिव ने कहा था कि जब तक शिक्षकों की बहाली नहीं होती, विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। वहां कक्षाएं लेने के लिए अधिकारियों और कर्मियों से आग्रह किया जाए। शिक्षा विभाग के अफसरों के मुताबिक, राज्यभर के 70 से अधिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण कक्षाएं नहीं होती हैं। गौरतलब है कि बीके राय हाई स्कूल में शिक्षक के अभाव में 15 महीनों से कक्षाएं नहीं हो रही थीं। पता चलने पर एसडीओ राकेश कुमार ने वैकल्पिक व्यवस्था की। आज वहां एसडीओ, सीओ, डीईओ समेत 15 अधिकारी और कर्मी शिक्षकों की भूमिका निभा रहे हैं।

सीओ होंगे नोडल पदाधिकारी : शिक्षकोंकी कमी दूर करने के लिए अपनाए जानेवाले मॉडल का नोडल पदाधिकारी विभिन्न अंचलों में सीओ को बनाया जाएगा। वैकल्पिक व्यवस्था में योगदान करनेवाले शिक्षकों का नियंत्रण सीओ के हाथों में होगा। शिक्षक सीओ को ही रिपोर्ट करेंगे। ये शिक्षक किस कक्षा में कौन-से विषय पढ़ाएंगे, इसका निर्णय उनकी योग्यता के अनुसार स्कूल के प्रधानाध्यापक करेंगे। कतरास के बीके राय मेमोरियल हाई स्कूल के लिए बाघमारा की सीओ दीप्ति प्रियंका कुजूर को नोडल पदाधिकारी नाया गया है।

127

हाईस्कूल हैं जिले में

1194

पदस्वीकृत हैं शिक्षकों के

976

पदपड़े हैं खाली

218

शिक्षकहैं कार्यरत

^कतरास के हाई स्कूल में कोई शिक्षक नहीं था। आज वहां 15 लोग पढ़ा रहे हैं। डीईओ की मदद से बिना शिक्षकों वाले या कम शिक्षकों वाले अन्य स्कूलों में भी यह व्यवस्था लागू की जाएगी। ऐसे स्कूलों की जानकारी डीईओ और डीएसई से मांगी गई है।’’ -राकेश कुमार, एसडीओ धनबाद

^हाई स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए एसडीओ ने जो मॉडल बनाया है, उसकी जानकारी शिक्षा सचिव को दी गई है। उन्होंने सभी जिलों के डीईओ को यह मॉडल अपनाने का निर्देश दिया है, जब तक शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो जाती है।’’ -डॉ माधुरी कुमारी, डीईओ, धनबाद

16 मई को छपी खबर।

यह है वैकल्पिक मॉडल : जिनस्कूलों में शिक्षकों की कमी से पढ़ाई बाधित है, वहां जाकर अधिकारी अपनी रुचि के विषयों की कक्षाएं लेंगे। ग्रामीण इलाकों में पंचायत सचिव, रोजगार सेवक, वीएलसी और कंप्यूटर ऑपरेटर हर दिन एक-एक क्लास लेंगे। यह उनकी इच्छा पर निर्भर होगा। गणित, विज्ञान और अंग्रेजी पढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्कूलों में पढ़ानेवाले अधिकारियों और कर्मियों को सम्मानित भी किया जाएगा। शहर के अन्य बुद्धिजीवियों को भी इस अभियान से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।

पिछले दिनों राज्य सरकार ने हाई स्कूलों में 18 हजार शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया शुरू की थी। इसमें कुछ तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से हाई कोर्ट ने प्रक्रिया को रद्द कर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। नए सिरे से बहाली में कम-से-कम छह महीने लग जाएंगे। इसलिए स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी भी हो गई है। सरकार ने बहाली की शर्तों में आॅनर्स पेपर के साथ संयुक्त विषय जोड़ दिया था। इस शर्त पर पुराने बीएड कोर्स वाले खरा नहीं उतर रहे थे। ऐसे लोगों की आपत्ति पर ही हाई कोर्ट ने बहाली प्रक्रिया को रद्द किया है। 

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