खूंटी : राजकीय बालिका मध्य विद्यालय में नामांकित छात्राओं की संख्या
630 है, पर पढ़ाने के लिए प्रभारी प्रधानाध्यापिका सहित शिक्षक -शिक्षिकाओं
की संख्या मात्र पांच है। जबकि शिक्षा विभाग ने 40 छात्रों को पढ़ाने के
लिए एक शिक्षक का पदास्थापन करने का निर्देश जारी किया है।
विद्यालय में गठित सरस्वती वाहिनी संचालन समिति के अध्यक्ष चमरा नायक, राम किशोर जायसवाल, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष अलित नायक सहित छह दर्जन से अधिक अभिभावकों ने शिक्षकों की कमी पर चिन्ता जताते हुए उपायुक्त एवं जिला शिक्षा अधीक्षक को दिए ज्ञापन में शिक्षकों की कमी दूर करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाए जाने की व्यवस्था करने की मांग की थी। ज्ञापन सौंपने के एक माह बाद भी मांग पूरी नहीं होने से अभिभावक अपनी बच्चियों के भविष्य को लेकर चिंतित हो गए हैं। इस विद्यालय में प्राय: गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले, अनुसूचित जाति-जनजाति, अल्पसंख्यक व पिछड़े वर्ग के लोगों की बच्चियां इस विद्यालय में पढ़तीं हैं। कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई होती है। पहले यह बुनियादी विद्यालय था। वर्तमान में दो शिक्षिका स्कूल में पढ़ा रही हैं। सेवानिवृत्ति के कारण अधिसंख्य शिक्षिका के पद रिक्त हैं। हालांकि, जिला शिक्षा अधीक्षक सुरेश चंद्र घोष ने तीन शिक्षकों का प्रतिनियोजन किया था, मगर शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो पाई है।
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आदेशपाल कराता है प्रार्थना
इस विद्यालय में शिक्षिकाएं समय से नहीं आती हैं। कक्षा आठ बजे से आरंभ करने का विभागीय आदेश है। पर, कोई भी शिक्षिका समय से नहीं आती है। इस कारण से आदेशपाल छात्राओं से प्रार्थना करवाता है। शिक्षिकाएं बाद में आती हैं। लेकिन शहर के बीच में संचालित इस विद्यालय का निरीक्षण करने और समय से शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति सुनिश्चित कराने का जहमत शिक्षा विभाग के अधिकारी नहीं उठाते हैं। बुधवार को प्रात: सवा आठ बजे कोई शिक्षिका विद्यालय नहीं पहुंची थी।
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प्रशिक्षण व अन्य कार्यक्रम
इसी विद्यालय में प्राय: प्रशिक्षण, बैठक और अन्य कार्यक्रम होते रहने से पढ़ाई पर असर पड़ता है, जबकि जिला शिक्षा अधीक्षक के पुराने कार्यालय का ऊपरी तल्ला खाली है। चमरा नायक बताते हैं कि उस भवन का उपयोग कर विद्यालय में पूर्ण शैक्षिक कार्य कराए जाने से पढ़ाई पर असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि एक ओर प्रधानमंत्री बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का अभियान चला रहे हैं, सरकार बालिका शिक्षा पर जोर दे रही है, मगर अधिकारी इस विद्यालय में सरकार के मिशन को पूरा करने पर ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। यही चिन्ता का विषय है।
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Jagran
विद्यालय में गठित सरस्वती वाहिनी संचालन समिति के अध्यक्ष चमरा नायक, राम किशोर जायसवाल, विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष अलित नायक सहित छह दर्जन से अधिक अभिभावकों ने शिक्षकों की कमी पर चिन्ता जताते हुए उपायुक्त एवं जिला शिक्षा अधीक्षक को दिए ज्ञापन में शिक्षकों की कमी दूर करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाए जाने की व्यवस्था करने की मांग की थी। ज्ञापन सौंपने के एक माह बाद भी मांग पूरी नहीं होने से अभिभावक अपनी बच्चियों के भविष्य को लेकर चिंतित हो गए हैं। इस विद्यालय में प्राय: गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले, अनुसूचित जाति-जनजाति, अल्पसंख्यक व पिछड़े वर्ग के लोगों की बच्चियां इस विद्यालय में पढ़तीं हैं। कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई होती है। पहले यह बुनियादी विद्यालय था। वर्तमान में दो शिक्षिका स्कूल में पढ़ा रही हैं। सेवानिवृत्ति के कारण अधिसंख्य शिक्षिका के पद रिक्त हैं। हालांकि, जिला शिक्षा अधीक्षक सुरेश चंद्र घोष ने तीन शिक्षकों का प्रतिनियोजन किया था, मगर शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो पाई है।
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आदेशपाल कराता है प्रार्थना
इस विद्यालय में शिक्षिकाएं समय से नहीं आती हैं। कक्षा आठ बजे से आरंभ करने का विभागीय आदेश है। पर, कोई भी शिक्षिका समय से नहीं आती है। इस कारण से आदेशपाल छात्राओं से प्रार्थना करवाता है। शिक्षिकाएं बाद में आती हैं। लेकिन शहर के बीच में संचालित इस विद्यालय का निरीक्षण करने और समय से शिक्षक-शिक्षिकाओं की उपस्थिति सुनिश्चित कराने का जहमत शिक्षा विभाग के अधिकारी नहीं उठाते हैं। बुधवार को प्रात: सवा आठ बजे कोई शिक्षिका विद्यालय नहीं पहुंची थी।
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प्रशिक्षण व अन्य कार्यक्रम
इसी विद्यालय में प्राय: प्रशिक्षण, बैठक और अन्य कार्यक्रम होते रहने से पढ़ाई पर असर पड़ता है, जबकि जिला शिक्षा अधीक्षक के पुराने कार्यालय का ऊपरी तल्ला खाली है। चमरा नायक बताते हैं कि उस भवन का उपयोग कर विद्यालय में पूर्ण शैक्षिक कार्य कराए जाने से पढ़ाई पर असर नहीं पड़ेगा। उनका कहना है कि एक ओर प्रधानमंत्री बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का अभियान चला रहे हैं, सरकार बालिका शिक्षा पर जोर दे रही है, मगर अधिकारी इस विद्यालय में सरकार के मिशन को पूरा करने पर ध्यान ही नहीं दे रहे हैं। यही चिन्ता का विषय है।