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विश्वविद्यालय शिक्षकों को सातवां वेतनमान देने के लिए यूजीसी राजी

रांची. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की पांच सदस्यीय कमेटी ने यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के शिक्षकों के 7वें वेतनमान बढ़ोतरी का रोड मैप तैयार कर लिया है। शीघ्र ही यूजीसी केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय को प्रस्ताव भेज दिया है।
शिक्षा मंत्रालय से स्वीकृति मिलने पर पहले फेज में इसका लाभ देश के 30 हजार केंद्रीय विश्वविद्यालयों के शिक्षकों को दिया जाएगा। इसके बाद स्टेट यूनिवर्सिटी के शिक्षकों का नंबर आएगा। गौरतलब है कि यूजीसी ने पिछले साल नौ जून को कमेटी का गठन किया था। इसमें प्रो. पी. दुराईसामी, प्रो. रामसिंह, सेवानिवृत्त आईएएस आरसी पांडा और एमएचआरडी के ज्वाइंट सेक्रेट्री प्रवीण कुमार शामिल थे। इस कमेटी को 31 दिसंबर 2016 तक वेतनमान रिपोर्ट सौंपने को कहा था। कमेटी की अनुशंसाओं में सेवानिवृत्ति की आयु में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस प्लान के तहत होनेवाली वेतन वृद्धि का 30 फीसदी खुद विश्वविद्यालय को वहन करने की सिफारिश की गई है।
सिफारिशें लागू होने पर ऐसा होगा वेतन का प्रारूप
नए वेतन को ऐसे समझा जा सकता है कि - केंद्रीय विवि के जिस शिक्षक का बेसिक 43 हजार और एकेडमिक ग्रेड पे (एजीपी) रुपए है, उन्हें वर्तमान में 1.23 लाख रुपए प्रतिमाह मिलता है। यूजीसी की सिफारिशें लागू होने पर उन्हें प्रतिमाह करीब 1.44 लाख रुपए मिलने लगेंगे।
केंद्रीय विश्वविद्यालय - वर्तमान
पे-स्केल भुगतान
50000-107000 123000
प्रस्तावित
59000-127000 144000
स्टेड यूनिवर्सिटी - वर्तमान
पे-स्केल भुगतान
50112-107648 109968
प्रस्तावित
58752-126208 128928
यूजीसी ने 22 फरवरी को शिक्षा मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट
यूजीसी ने 22 फरवरी को विवि शिक्षकों के 7वें वेतनमान संबंधी रिपोर्ट केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को सौंपी। यदि विवि शिक्षकों के वेतनमान में बढ़ोतरी यूजीसी की सिफारिशों के अनुसार होती है, तो बेसिक वेतन यानी एकेडमिक ग्रेड-पे को 2.72 के गुणांक के बराबर भुगतान किया जाएगा। गौरतलब है कि यूजीसी ने 7वें पे कमीशन की जो रिपोर्ट स्वीकार की थी, उसमें सिविल सर्विसेज समेत अन्य केंद्रीय कर्मचारियों के नए भुगतान के लिए यह फार्मूला लागू किया गया था।
वित्तीय संसाधन बढ़ाए केंद्रीय विश्वविद्यालय : यूजीसी
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने देश के 40 केंद्रीय विश्वविद्यालयों को आंतरिक वित्तीय संसाधन बढ़ाने को कहा है। हालांकि स्टेट यूनिवर्सिटीज को आंतरिक संसाधन बढ़ाने के लिए बाध्य नहीं किया है। हालांकि जब-जब केंद्रीय विश्वविद्यालयों में वेतनमान संबंधी प्लान लागू किया जाता है, तब-तब उसे स्टेट यूनिवर्सिटी के लिए भी राज्य सरकारें स्वीकार कर लेती हैं।

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