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रांची में शिक्षक बने भिक्षुक, शिक्षा मंत्री ने जताई नाराजगी

शिक्षक दिवस के मौके पर राजधानी रांची के एक कोने में जहां गुलजार माहौल के बीच शिक्षकों को सम्मानित किया जा रहा था वहीं दूसरी ओर राजधानी रांची में ही शिक्षकों का एक बड़ा समहू अपनी किस्मत को कोसते हुए भिक्षाटन कर रहा था.
शिक्षक दिवस के मौके पर एक बार फिर वित्त रहित शिक्षकों ने सरकार से नाराजगी जताते हुए राजभवन के पास भिक्षाटन किया. इन शिक्षकों का कहना है कि उन्हें सरकारी अनुदान से वंचित किया जा रहा है.

बता दें कि जैक सभागार में शिक्षा विभाग ने आज शिक्षक दिवस के मौके पर कुल 12 शिक्षकों को सम्मानित किया. सम्मान पाने वाले शिक्षक गदगद थे कि सरकार ने उन्हें उनकी काबिलियत के बल पर पुरस्कार के लिए चुना है. वहीं धरना दे रहे शिक्षकों को लग रहा था कि अब कोई उन्हें शिक्षक कहकर न पुकारे.

जैक सभागार में आयोजित कार्यक्रम में सूबे की शिक्षा मंत्री नीरा यादव के अलावा मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी, स्कूली शिक्षा के प्रधान सचिव एपी सिंह, माध्यमिक शिक्षा निदेशक उमाशंकर सिंह के अलावा जैक के चैयरमैन डॉ. अरविंद कुमार सिंह मौजूद थे. जाहिर तौर पर स्कूली शिक्षा सचिव एपी सिंह ने कहा कि अनुदान नियमानुसार दिया जा रहा है.

दूसरी तरफ शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षकों को भिक्षाटन जैसे कार्यक्रम से परहेज करना चाहिए था.  उन्होंने कहा कि मैंने सभी से आग्रह किया था कि वे राजभवन के सामने धरना देने के बजाय अगर जैक सभागार में आएंगे तब हमें बड़ी खुशी होगी. उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों की मांगों पर लगातार विचार कर रही है. शिक्षकों की मांगों पर गौर किया जा रहा है. एक-एक कर मांगें भी पूरी की जा रही है. लेकिन दोबारा यह भी कहना चाहूंगी कि हर मांग को पूरा किया जाना संभव नहीं होता है.

कुल मिलाकर कहें तो शिक्षक दिवस के मौके पर शिक्षकों के चेहरों पर खुशी दिखाई नहीं पड़ी. सरकार न तो वित्त रहित शिक्षकों और न ही पारा शिक्षकों पर कोई फैसला ले पा रही है.

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