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पांच जनवरी तक मांगों पर विचार नहीं हुआ तो पारा शिक्षक करेंगे पीएम का विरोध

रांची। एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के सदस्यों ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 5 जनवरी से पहले सेवा स्थायी करने सहित अन्य मांगों पर वार्ता कर हल निकाला तो 5 जनवरी को झारखंड में होने वाले कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध किया जायेगा।
रविवार को एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के सदस्य हृषिकेश पाठक ने कहा कि मोर्चा के बैनर तले पारा शिक्षकों की हड़ताल को 45 दिन हो गए। राज्य सरकार ने दंडात्मक कार्रवाई, वार्ता की घुट्टी आदि कई तरह से हमारे आंदोलन को तितर-बितर करना चाहा, लेकिन हमारी अटल एकता ने सरकार की इन सारी कार्यवाई को निरस्त करते हुए लगातार हड़ताल पर जमे हैं और जब तक मांगें पूरी नहीं होगी आंदोलन जारी रहेगा। पाठक ने कहा कि सरकार के सचिवों ने कई तरह से सरकार और पारा शिक्षकों को बरगलाने का काम किया है। इसके लिए कई हथकंडे अपनाए गये, लेकिन कभी भी हमारे और हमारे परिवार के भविष्य के बारे में गंभीरता पूर्वक नहीं सोचा गया।
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उन्होंने कहा कि आंदोलन में मृत, लापता पारा शिक्षक और दंडात्मक कार्यवाही से ग्रसित पारा शिक्षकों के प्रति तनिक भी संवेदनाएं नहीं दिखाई। फिर भी हम सभी पारा शिक्षक सरकार से निवेदन करते हैं कि आगामी 2019 नए साल में नई ऊर्जा और सोच के साथ हम सभी पारा शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए कदम बढ़ाए और हम सभी झारखंडी मूलवासियों के साथ न्याय करे। अन्यथा हम सभी पारा शिक्षको को दो जनवरी 2019 को होने वाली प्रदेश बैठक में मजबूरन सख्त रणनीति के साथ आगे बढ़ना होगा।
मोर्चा के सदस्य बजरंग प्रसाद ने कहा कि एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के बैनर तले राज्य के 24 जिलो में आज रविवार को बैठक हुई। बैठक में आंदोलन की समीक्षा एवं रणनीति तैयार की गई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आगमन 5 जनवरी को हो रहा है। अगर मुख्यमंत्री 5 जनवरी से पहले पारा शिक्षकों की समस्या एवं हड़ताल को लेकर बात नहीं करते हैं, तो प्रधानमंत्री का विरोध राज्य के तमाम पारा शिक्षक करेंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री से वार्ता हुई थी, वार्ता विफल रही। मानदेय बढ़ाने की बातें हो रही थी पारा शिक्षक नेताओं ने कहा कि मानदेय नहीं, हमें पारा शिक्षकों की एक नियमावली बननी चाहिए और टेट पास पारा शिक्षकों के सहायक शिक्षक समायोजन किया जाए। सहमति नहीं बनने पर विफल होने के बाद सभी विधायक आवास के समक्ष पारा शिक्षक दिन में धरना देते आ रहे हैं। पारा शिक्षक किसी भी कीमत पर इस बार झुकने वाले नहीं हैं, हड़ताल जारी है।
67 हजार पारा शिक्षक सेवा स्थायी करने के लिए आंदोलन कर रहे हैं
राज्य में 67 हजार पारा शिक्षक सेवा स्थायी करने समेत अन्य मांगों को लेकर डेढ़ महीने से आंदोलन कर रहे हैं। इसी दौरान अलग-अलग जगहों पर सरकार के मंत्रियों के आवास के सामने धरना देने का कार्यक्रम चलाया। पारा शिक्षकों की हड़ताल की वजह से राज्य के अधिकतर स्कूलों में पढ़ाई ठप है। 

इसी सिलसिले में राज्य की आदिवासी कल्याण मंत्री डॉ. लुईस मरांडी के दुमका स्थति आवास के सामने पारा शिक्षक धरने पर बैठे थे। इनमें कंचन दास भी शामिल थे। 16 दिसंबर की सुबह उनकी मौत हो गई। वे नोनीहाट के पास चिना डंगाल गांव के स्कूल में कार्यरत थे। कंचन की मौत के बाद हड़ताली पारा शिक्षकों का गुस्सा उबाल पर है। दरअसल, एक महीने में इस आंदोलन के दौरान अलग-अलग जगहों पर गढ़वा जिला के रंका के उदय शंकर पांडेय, देवघर जिला के सारठ थाना क्षेत्र के पारबाद गांव निवासी उज्जवल कुमार राय सहित 10 शिक्षकों की मौत हो चुकी है तथा एक लापता है। एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के संजय दूबे बताते हैं कि सरकार की हठधर्मिता से राज्य के 67 हजार पारा शिक्षक बेहद कठिन दौर से गुजर रहे हैं। सच पूछिए तो रातों में नींद नहीं आती। मन घबराता है कि न जाने कब कहां से अपशकुन खबर सामने आ जाए।

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