(रांची): झारखंड विधानसभा के शीतकालीन
सत्र के अंतिम दिन गुरूवार को झामुमो और झाविमो ने कार्यस्थगन के माध्यम से
प्लस टू शिक्षक सहित दूसरी रिक्तियों में बाहरी लोगों को नियुक्त किये
जाने का मुद्द उठाया। विधायक भानू प्रताप शाही ने नियुक्तियों की जांच के
लिए राजस्व मंत्री अमर कुमारी बाउरी की अध्यक्षता में बनी कमेटी की रिपोर्ट
सदन में रखने की मांग की।
वहीं झामुमो के जगन्नाथ महतो और रवींद्र महतो ने
कहा कि प्लसू टू शिक्षकों की नियुक्ति में 75 फीसदी बाहरी युवकों का चयन
किया गया है। उन्होंने कार्यस्थगन के माध्यम से सरकार से स्थिति स्पष्ट
करने की मांग की।इस दौरान झामुमो के तमाम विधायक वेल में आकर बहाली रद्द करने की मांग करने लगे। झामुमो विधायक स्टीफन मरांडी ने कहा कि राज्य में सभी पदों पर बाहरी व्यक्तियों की नियुक्ति हो रही है, जबकि दूसरे राज्यों में यह छूट नहीं है। झाविमो के प्रदीप यादव ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण 80 प्रतिशत बाहरी लोगों की नियुक्ति हो गयी। विधायक भानू प्रताप शाही ने कहा कि झारखंड के बेरोजगारों का हक छिना जा रहा है, हालांकि विपक्षी दलों द्वारा उठाये गये इस सवाल पर सरकार की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव के समझाने के बाद विधायक शांत हुए। हंगामे के बीच ही सरकार ने आरक्षण संशोधन विधेयक और कैग रिपोर्ट की प्रति सभा पटल पर रखा। इसके अलावा बसपा विधायक शिवपूजन मेहता के साथ दुर्व्यवहार का मसला भी उठाया।
झारखंड विस का शीतकालीन सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
झारखंड विधानसभा शीतकालीन सत्र तीन दिवसीय शीतकालीन सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। सत्र के अंतिम दिन पांच विधेयकों को मंजूरी प्रदान की गई।