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पारा शिक्षकों की मांग पूरी हो, यह नहीं चाहती सरकार : कांग्रेस

Ranchi : झारखंड प्रदेश कांग्रेस पार्टी ने पिछले कई दिनों से आंदोलनरत पारा शिक्षक, रसोइया संघ, आंगनबाड़ी सेविका की मांगों का समर्थन करने का फैसला किया है.
इस बाबत प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने जिला तथा प्रखंड कांग्रेस कमिटी के अध्यक्षों को निर्देश दिया है कि वे पारा शिक्षकों का अपने-अपने क्षेत्रों में सहयोग और समर्थन करें. साथ ही, पार्टी ने राज्य सरकार द्वारा पारा शिक्षकों की गिरफ्तारी एवं उन पर बल प्रयोग की भी कड़ी निंदा की है.
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सरकार की उदासीनता के कारण विफल हुई वार्ता

पार्टी मुख्यालय में बुधवार को आयोजित प्रेसवार्ता में पार्टी प्रवक्ता लाल किशोर नाथ शाहदेव ने बताया कि राज्य के पारा शिक्षक पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन राज्य की रघुवर सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंगती. एक लंबे संघर्ष के बाद आठ नवंबर को पारा शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने राज्य के मुख्य सचिव के साथ मिलकर वार्ता की थी. फिर भी सरकार की उदासीनता के कारण यह वार्ता विफल रही. शाहदेव ने कहा कि दरअसल, मुख्यमंत्री रघुवर दास पारा शिक्षकों की मांगों को पूरा नहीं करना चाहते, क्योंकि वार्ता में वेतनमान एवं स्थायीकरण के कई मामले कोर्ट में लंबित होने का हवाला देते हुए मुख्य सचिव ने इस पर कोई भी निर्णय लेने से इनकार कर दिया. जबकि, हकीकत यह है कि पारा शिक्षक संघ की ओर से किसी ने न्यायालय में अपील नहीं की है.
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सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों को नहीं मान रही है सरकार

उन्होंने कहा कि एक ओर राज्य सरकार न्यायालय का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी ओर 26 अक्टूबर 2016 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को लागू करने से पीछे हट रही है. उस निर्णय में कहा कहा गया है कि समान काम के बदले समान वेतन एवं दस वर्षों की सेवा के उपरांत स्थायीकरण का प्रवाधन हो. सुप्रीम कोर्ट ने 26 अक्टूबर को अपने फैसले में कहा है कि सभी अस्थायी कर्मचारी को बराबर वेतन मिलना चाहिए. सर्वोच्च अदालत के जस्टिस जेएस खेहर और जस्टिस बोडगे की पीठ ने समान काम के लिए समान वेतन के सिद्धांत पर जरूर अमल होना चाहिए. किसी को मेहनत का फल न देना न केवल अपमानजनक है, बल्कि मानवीय गरिमा की बुनियाद पर कुठाराघात भी है.

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