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शिक्षक होने के नाते नहीं, नागरिक अधिकार के तहत की अभिव्यक्ति

जमशेदपुर. ग्रेजुएट कॉलेज के बीएड विभाग में कार्यरत शिक्षक जीतराय हांसदा द्वारा सोशल साइट पर डाले गये पोस्ट को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. जीतराय हांसदा ने शुक्रवार को बताया कि सोशल साइट पर उन्होंने बीफ को लेकर जो कुछ भी सामग्री डाली है, वह उनका निजी विचार है. एक शिक्षक के नाते उन्होंने उक्त बातें नहीं लिखी है.

उन्होंने कहा कि वे एक शिक्षक के साथ-साथ भारत के नागरिक व आदिवासी भी हैं. इसी वजह से भारतीय संविधान में मिले अभिव्यक्ति के अधिकार का उन्होंने उपयोग किया. उन्होंने बताया कि अगर वे स्कूल या फिर कॉलेज परिसर के अंदर इस तरह की बातें करते या फिर छात्राअों को मोटिवेट करते तो फिर वे दोषी हो सकते थे, लेकिन अपने विचारों को उन्होंने सोशल मीडिया के जरिये सार्वजनिक किया है. लेकिन इस मामले में अगर उनसे किसी प्रकार का जवाब-तलब किया जायेगा तो अपने पक्ष को रखेंगे.
 

लिखित शिकायत मिलने पर होगी जांच : कुलपति. विवि की कुलपति डॉ शुक्ला मोहंती ने कहा कि फिलहाल किसी प्रकार का कोई ज्ञापन नहीं मिला है. लिखित रूप से अगर कोई मांग की जाती है तो पूरे मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जायेगी.विवि प्रशासन के पास भेजा गया है .

मामला : प्रिंसिपल. ग्रेजुएट कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ उषा शुक्ला ने कहा कि एक छात्र संगठन की अोर से विवि की कुलपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया था. उक्त ज्ञापन में जीतराय हांसदा पर कार्रवाई की मांग की गयी थी. ज्ञापन को विवि प्रशासन के पास भेज दिया गया है. विवि के स्तर से ही इस मामले में कोई निर्णय लिया जायेगा.

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