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वाणिज्य स्नातक के नवनियुक्त शिक्षकों को 12 महीनों से वेतन नहीं

देवघर: देवघर में उच्च प्राथमिक कक्षा के लिए स्नातक प्रशिक्षित वाणिज्य संकाय के आठ अभ्यर्थियों का चयन नवनियुक्त शिक्षक पद पर हुआ. लेकिन, प्रशासनिक अधिकारी द्वारा स्पष्टीकरण के माध्यम से पूछा गया है कि आपकी नियुक्ति शिक्षक पद पर कैसे हुई. जबकि विभाग ने अधिसूचना के तहत सभी आवश्यक प्रक्रिया पूरा करने के साथ-साथ शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बाद सितंबर से दिसंबर 2016 तक वेतन का भुगतान किया गया. लेकिन, इससे पहले जनवरी से अगस्त 2016 एवं जनवरी 2017 से अबतक का बकाया वेतन  का भुगतान विभाग द्वारा नहीं किया गया. वहीं कई प्रखंडों में कुछ शिक्षकों का वेतन का भुगतान अद्यतन कर दिया गया है. 

प्रशासनिक अधिकारी द्वारा पूछे गये स्पष्टीकरण का जवाब नवनियुक्त शिक्षकों द्वारा निर्धारित अवधि में साक्ष्य के साथ दे दिया गया. बावजूद अबतक विभाग के स्तर से कोई सकारात्मक पहल नहीं की गयी है. नतीजा 12 महीनों से वेतन के अभाव में नवनियुक्त  शिक्षकों के समक्ष आर्थिक संकट गहरा गया है. इससे पहले चयनित नवनियुक्त शिक्षकों को जनवरी 2016 में योगदान कराया गया. विभागीय स्तर पर प्रशिक्षण के बाद नवनियुक्त शिक्षकों को विभिन्न प्रखंडों के विद्यालयों में पदस्थापित किया गया.
 

कैसे हुई नियुक्ति, अब गलती किसकी : वाणिज्य स्नातक अभ्यर्थियों ने अधिसूचना के तहत आवेदन किया. सभी आवश्यक प्रक्रिया को अपनाया. काउंसेलिंग में शामिल हुए. काउंसेलिंग टीम द्वारा सभी शैक्षणिक व प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्रों का मिलान के बाद मेधा सूची में अंतिम रूप से अभ्यर्थियों का नाम शामिल किया गया. बावजूद उपायुक्त देवघर द्वारा स्पष्टीकरण पूछा गया. उपायुक्त द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि नवनियुक्त शिक्षकों द्वारा योग्यता स्नातक विज्ञान व वाणिज्य से प्राप्त किया गया है, लेकिन आपकी नियुक्ति स्नातक प्रशिक्षित भाषा व कला कोटि में की गयी है.

जबकि जिले में शिक्षक नियुक्ति (वर्ग छह से आठ) में विधिवत आवेदन के माध्यम से शैक्षणिक, प्रशैक्षणिक प्रमाण पत्र सहित अंक पत्रों एवं अन्य प्रमाण पत्रों की स्वहस्ताक्षरित फोटो कॉपी कार्यालय को उपलब्ध कराकर नियुक्ति पत्र प्राप्त किया गया है. अब बड़ा सवाल यह है कि आर्हता पूरी नहीं करने के बाद भी अभ्यर्थियों का चयन व नियुक्ति कैसे हुई. क्या काउंसेलिंग टीम ने सभी नियमों को ताक पर रख कर और जानबूझ कर विभाग को गुमराह किया. अगर यह सही है तो देखने वाली बात होगी कि विभाग द्वारा क्या कार्रवाई की जाती है.

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