जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : झारखंड सरकार का निर्देश है कि सरकारी स्कूल के शिक्षकों की
प्रतिनियुक्ति गृह प्रखंड में की जाए, लेकिन पूर्वी सिंहभूम जिले में इसका
अनुपालन नहीं किया जा रहा है।
यहां मनमाने ढंग से शिक्षकों का स्थानांतरण किया जा रहा है, जिसका सीधा असर शिक्षकों के साथ-साथ छात्रों पर भी पड़ रहा है। किसी स्कूल में 400 बच्चों पर एक शिक्षक हैं, तो कहीं 700 छात्र पर एक शिक्षक। वह कैसे पढ़ाएंगे, इसका बस अनुमान लगाया जा सकता है।
इन्हीं मुद्दों पर झारखंड विकास मोर्चा मंगलवार को जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय पर धरना देगा। सोमवार को काशीडीह कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पार्टी के केंद्रीय महासचिव अभय सिंह ने बताया कि धरना झारखंड विकास युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष सुमित श्रीवास्तव की अगुवाई में होगा, लेकिन इसमें पार्टी के अन्य पदाधिकारी-कार्यकर्ता शामिल होंगे। सिंह ने कहा कि जिला शिक्षा विभाग नियुक्ति व रिक्त पदों की संख्या भी छिपा रहा है।
जिले में शिक्षकों के 1000 पद रिक्त हैं, लेकिन 358 दिखाया जा रहा है। इसी तरह जमशेदपुर में 110 पद के स्थान पर 40 पद रिक्त बताया जा रहा है। यही नहीं, 2016 में 14 शिक्षकों का तबादला गृह प्रखंड में किया गया, लेकिन एक वर्ष के अंदर दोबारा उनका स्थानांतरण दूसरे प्रखंड में कर दिया गया। सरकार उन्हें वहां क्वार्टर उपलब्ध कराए, तब तो ठीक है। वरना उनका दिन तो प्रतिदिन 70-80 किलोमीटर आने-जाने में ही बीत जाएगा, वह क्या पढ़ाएंगे। जब शिक्षक का मन ही अशांत रहेगा, तो बच्चों को अच्छी शिक्षा कैसे मिलेगी। संवाददाता सम्मेलन में झाविमो के जिलाध्यक्ष बबुआ सिंह, झावियुमो जिलाध्यक्ष सुमित श्रीवास्तव, रविशंकर व सुरजीत सिंह छित्ते भी उपस्थित थे।
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सातवीं तक पढ़ाते हैं एक शिक्षक
अभय सिंह ने बताया कि झारखंड के सरकारी स्कूलों की हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सात-आठ सौ बच्चों पर एक ही शिक्षक हैं। मुख्यमंत्री के क्षेत्र में कालिंदी बस्ती के स्कूल में सातवीं तक की पढ़ाई एक शिक्षक के जिम्मे है। उसी तरह खड़ंगाझार में एक स्कूल है, जहां करीब 800 छात्रों पर एक शिक्षक हैं। सरकार एक छात्र पर औसतन 7000 रुपये खर्च करती है, इसके बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल रही है। इसकी वजह सरकारी अधिकारियों की मनमानी या लापरवाही है।
यहां मनमाने ढंग से शिक्षकों का स्थानांतरण किया जा रहा है, जिसका सीधा असर शिक्षकों के साथ-साथ छात्रों पर भी पड़ रहा है। किसी स्कूल में 400 बच्चों पर एक शिक्षक हैं, तो कहीं 700 छात्र पर एक शिक्षक। वह कैसे पढ़ाएंगे, इसका बस अनुमान लगाया जा सकता है।
इन्हीं मुद्दों पर झारखंड विकास मोर्चा मंगलवार को जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय पर धरना देगा। सोमवार को काशीडीह कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पार्टी के केंद्रीय महासचिव अभय सिंह ने बताया कि धरना झारखंड विकास युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष सुमित श्रीवास्तव की अगुवाई में होगा, लेकिन इसमें पार्टी के अन्य पदाधिकारी-कार्यकर्ता शामिल होंगे। सिंह ने कहा कि जिला शिक्षा विभाग नियुक्ति व रिक्त पदों की संख्या भी छिपा रहा है।
जिले में शिक्षकों के 1000 पद रिक्त हैं, लेकिन 358 दिखाया जा रहा है। इसी तरह जमशेदपुर में 110 पद के स्थान पर 40 पद रिक्त बताया जा रहा है। यही नहीं, 2016 में 14 शिक्षकों का तबादला गृह प्रखंड में किया गया, लेकिन एक वर्ष के अंदर दोबारा उनका स्थानांतरण दूसरे प्रखंड में कर दिया गया। सरकार उन्हें वहां क्वार्टर उपलब्ध कराए, तब तो ठीक है। वरना उनका दिन तो प्रतिदिन 70-80 किलोमीटर आने-जाने में ही बीत जाएगा, वह क्या पढ़ाएंगे। जब शिक्षक का मन ही अशांत रहेगा, तो बच्चों को अच्छी शिक्षा कैसे मिलेगी। संवाददाता सम्मेलन में झाविमो के जिलाध्यक्ष बबुआ सिंह, झावियुमो जिलाध्यक्ष सुमित श्रीवास्तव, रविशंकर व सुरजीत सिंह छित्ते भी उपस्थित थे।
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सातवीं तक पढ़ाते हैं एक शिक्षक
अभय सिंह ने बताया कि झारखंड के सरकारी स्कूलों की हालत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सात-आठ सौ बच्चों पर एक ही शिक्षक हैं। मुख्यमंत्री के क्षेत्र में कालिंदी बस्ती के स्कूल में सातवीं तक की पढ़ाई एक शिक्षक के जिम्मे है। उसी तरह खड़ंगाझार में एक स्कूल है, जहां करीब 800 छात्रों पर एक शिक्षक हैं। सरकार एक छात्र पर औसतन 7000 रुपये खर्च करती है, इसके बावजूद गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल रही है। इसकी वजह सरकारी अधिकारियों की मनमानी या लापरवाही है।