विश्रामपुर के लालगढ़ उच्च विद्यालय को उत्क्रमित कर प्लस टू का दर्जा दे
दिया गया है। इस वर्ष से चालू सत्र 2017-19 में विज्ञान कला संकाय में
नामांकन भी कर लिया गया है।
दोनों संकाय के लए 128-128 सीट निर्धारित हैं। लेेकिन नामांकन के बाद से छात्रों काे क्लास के लिए तो स्कूल प्रशासन द्वारा बुलाया गया है और ना ही छात्र अपनी मर्जी से स्कूल गये हैं। इसका कारण यह रहा है कि पहले से शिक्षक के अभाव मेंे मैट्रिक पास होने वाले छात्र पूर्व से अवगत हैं कि उन्हें बस स्कूल में केवल नाम ही लिखाना है। पढ़ने का काम कहीं और ट्यूटर अथवा कोचिंग सेंटर में करना होगा। उल्लेखनीय है कि हाई स्कूल में अभी एक मात्र प्रभारी प्रधानाध्यापक अशफाक अहमद ही हाई स्कूल के टीचर हैं। उन्हें भी प्रतिनियेाजन पर वहां भेजा गया है। उनके अलावा दो अन्य शिक्षकों का प्रतिनियेाजन भी विद्यालय में किया गया है। एक शिक्षक चैनपुर के कुंडपानी प्रावि के सुधीर ओझा तथा दूसरे तोलरा मवि में पदस्थापित रेशमा कुमारी को यहां प्रतिनियेाजन पर भेजा गया है। इस तरह देखा जाये तो प्राईमरी स्कूल के प्रतिनियेाजित शिक्षकों के भरोसे ही प्लस टू के बच्चों का भी नामांकन किया गया है। ऐसी स्थिति में जबकि विद्यालय में कोई स्थायी प्राचार्य या शिक्षक नही ंहै प्लस टृ के बच्चों के लिए विद्यालय में पठन-पाठन की कल्पना बेमानी है।
नामांकनके बाद एक दिन भी स्कूल नहीं गये छात्र : इंटरमें नामांकन कराने वाले छात्र नामांकन के बाद से एक दिन भी सकूल नहीं गये हैं। कहा जाये तो विद्यालय में वेलकम कार्यक्रम की बात तो दूर छात्रों का परिचयात्मक क्लास अथ्वा कार्यक्रम भी नहीं हो पाया है। जबकि नामांकन के बाद सभी बच्चे पढ़ाई के लिए विभिन्न कोचिंग संस्थानों जुड़ चुके हैं।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक अशफाक अहमद का कहना है कि पहले ही उनके पास शिक्षक का अभाव रहा है। काफी प्रयास के बाद उन्हें दो प्राइमरी टीचर मिल पाये हैं। अब ऐसी स्थिति में इंटर के बच्चों को स्कूल बुलाना भी उनका समय बर्बाद करना होगा। वैसे हमने इस बात को लेकर जिला शिक्षा पदाधिाकरी से बात की है।
दोनों संकाय के लए 128-128 सीट निर्धारित हैं। लेेकिन नामांकन के बाद से छात्रों काे क्लास के लिए तो स्कूल प्रशासन द्वारा बुलाया गया है और ना ही छात्र अपनी मर्जी से स्कूल गये हैं। इसका कारण यह रहा है कि पहले से शिक्षक के अभाव मेंे मैट्रिक पास होने वाले छात्र पूर्व से अवगत हैं कि उन्हें बस स्कूल में केवल नाम ही लिखाना है। पढ़ने का काम कहीं और ट्यूटर अथवा कोचिंग सेंटर में करना होगा। उल्लेखनीय है कि हाई स्कूल में अभी एक मात्र प्रभारी प्रधानाध्यापक अशफाक अहमद ही हाई स्कूल के टीचर हैं। उन्हें भी प्रतिनियेाजन पर वहां भेजा गया है। उनके अलावा दो अन्य शिक्षकों का प्रतिनियेाजन भी विद्यालय में किया गया है। एक शिक्षक चैनपुर के कुंडपानी प्रावि के सुधीर ओझा तथा दूसरे तोलरा मवि में पदस्थापित रेशमा कुमारी को यहां प्रतिनियेाजन पर भेजा गया है। इस तरह देखा जाये तो प्राईमरी स्कूल के प्रतिनियेाजित शिक्षकों के भरोसे ही प्लस टू के बच्चों का भी नामांकन किया गया है। ऐसी स्थिति में जबकि विद्यालय में कोई स्थायी प्राचार्य या शिक्षक नही ंहै प्लस टृ के बच्चों के लिए विद्यालय में पठन-पाठन की कल्पना बेमानी है।
नामांकनके बाद एक दिन भी स्कूल नहीं गये छात्र : इंटरमें नामांकन कराने वाले छात्र नामांकन के बाद से एक दिन भी सकूल नहीं गये हैं। कहा जाये तो विद्यालय में वेलकम कार्यक्रम की बात तो दूर छात्रों का परिचयात्मक क्लास अथ्वा कार्यक्रम भी नहीं हो पाया है। जबकि नामांकन के बाद सभी बच्चे पढ़ाई के लिए विभिन्न कोचिंग संस्थानों जुड़ चुके हैं।
विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक अशफाक अहमद का कहना है कि पहले ही उनके पास शिक्षक का अभाव रहा है। काफी प्रयास के बाद उन्हें दो प्राइमरी टीचर मिल पाये हैं। अब ऐसी स्थिति में इंटर के बच्चों को स्कूल बुलाना भी उनका समय बर्बाद करना होगा। वैसे हमने इस बात को लेकर जिला शिक्षा पदाधिाकरी से बात की है।