- दो शिक्षकों को प्रोन्नति की सूची बनाने के लिए एक वर्ष तक डीएसई
कार्यालय में रखा गया
- स्कूल में होते तो पढ़ाते, यहां तो और गड़बड़ कर दी : महासचिव
जागरण संवाददाता
धनबाद : सरकारी शिक्षक स्कूलों में पढ़ाने के लिए हैं न कि असैनिक कार्य करने के लिए। अगर उनसे विभागीय कार्य लिया भी जा रहा है तो उसमें त्रुटि की गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए। बावजूद इसके विभागीय कार्य के लिए शिक्षकों को लगाया गया, लगभग दस लाख रुपये भी खर्च हुए। फिर भी प्रमोशन की सूची तैयार करने में त्रुटियां रह गई। यह कहना है अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला महासचिव नंदकिशोर सिंह का। इस मामले को लेकर नंदकिशोर सिंह ने उपायुक्त को भी पत्र दिया है। पत्र के माध्यम से कहा है कि प्रारंभिक शिक्षकों के ग्रेड-4 एवं ग्रेड-7 में प्रोन्नति के लिए अनुमोदित सूची में विसंगति रह गई है। महासचिव के अनुसार इस काम के लिए एक शिक्षक को एक वर्ष और एक अन्य शिक्षक को लगभग छह माह तक डीएसई कार्यालय में लगाया गया। विभाग के पास 27 लिपिक-कर्मचारी होने के बाद भी इन शिक्षकों को प्रोन्नति की सूची बनाने का काम सौंपा गया। इन शिक्षकों को वेतन मद में लगभग दस लाख रुपये मिले। यदि स्कूल में रहते तो इसी वेतन में बच्चों को पढ़ाने का काम करते, लेकिन यहां तो प्रोन्नति सूची ही गड़बड़ कर दी। इसलिए अनुमोदित शिक्षकों की सूची सार्वजनिक करते हुए इसमें सुधार करने की मांग की गई है।
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यहां हुई हैं त्रुटियां
- विसंगति के कारण शिक्षकों का वरीयताक्रम नीचे हो गया है।
- अंतरराज्यीय एवं जिला स्थानांतरित शिक्षक अपनी नियुक्ति तिथि आधार पर वरीयता क्रम में शामिल हैं।
- अनुमोदित सूची में कुछ अनुकंपा पर नियुक्त शिक्षक त्रुटि के कारण गलत वरीयता क्रम में शामिल हैं।
- योगदान की तिथियों में गड़बड़ी के कारण कनीय शिक्षक वरीय हो गए हैं।
- नवंबर 2016 के पहले मृत शिक्षक का नाम भी इस सूची में शामिल है।
- स्कूल में होते तो पढ़ाते, यहां तो और गड़बड़ कर दी : महासचिव
जागरण संवाददाता
धनबाद : सरकारी शिक्षक स्कूलों में पढ़ाने के लिए हैं न कि असैनिक कार्य करने के लिए। अगर उनसे विभागीय कार्य लिया भी जा रहा है तो उसमें त्रुटि की गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए। बावजूद इसके विभागीय कार्य के लिए शिक्षकों को लगाया गया, लगभग दस लाख रुपये भी खर्च हुए। फिर भी प्रमोशन की सूची तैयार करने में त्रुटियां रह गई। यह कहना है अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला महासचिव नंदकिशोर सिंह का। इस मामले को लेकर नंदकिशोर सिंह ने उपायुक्त को भी पत्र दिया है। पत्र के माध्यम से कहा है कि प्रारंभिक शिक्षकों के ग्रेड-4 एवं ग्रेड-7 में प्रोन्नति के लिए अनुमोदित सूची में विसंगति रह गई है। महासचिव के अनुसार इस काम के लिए एक शिक्षक को एक वर्ष और एक अन्य शिक्षक को लगभग छह माह तक डीएसई कार्यालय में लगाया गया। विभाग के पास 27 लिपिक-कर्मचारी होने के बाद भी इन शिक्षकों को प्रोन्नति की सूची बनाने का काम सौंपा गया। इन शिक्षकों को वेतन मद में लगभग दस लाख रुपये मिले। यदि स्कूल में रहते तो इसी वेतन में बच्चों को पढ़ाने का काम करते, लेकिन यहां तो प्रोन्नति सूची ही गड़बड़ कर दी। इसलिए अनुमोदित शिक्षकों की सूची सार्वजनिक करते हुए इसमें सुधार करने की मांग की गई है।
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यहां हुई हैं त्रुटियां
- विसंगति के कारण शिक्षकों का वरीयताक्रम नीचे हो गया है।
- अंतरराज्यीय एवं जिला स्थानांतरित शिक्षक अपनी नियुक्ति तिथि आधार पर वरीयता क्रम में शामिल हैं।
- अनुमोदित सूची में कुछ अनुकंपा पर नियुक्त शिक्षक त्रुटि के कारण गलत वरीयता क्रम में शामिल हैं।
- योगदान की तिथियों में गड़बड़ी के कारण कनीय शिक्षक वरीय हो गए हैं।
- नवंबर 2016 के पहले मृत शिक्षक का नाम भी इस सूची में शामिल है।