जामताड़ा : स्कूलों में फर्जी दाखिला व सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़े पर
रोक लगाने के लिए स्कूल व कॉलेज के बच्चों को यूनिक आइडी नंबर से जोड़ा जा
रहा है। इसके लिए विभाग सभी सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों को सूचित कर
बच्चों का यूनिक आईडी नंबर सृजित करवा रहा है।
इसमें बच्चों का आधार नंबर भी शामिल होगा। ऐसे में यूनिक आईडी नंबर से एक स्कूल के बच्चे का नाम अगर दूसरे स्कूल में है तो इसकी कलई खुलेगी ही उपस्थिति के फर्जीवाड़े की पोल खुलना तय माना जा रहा है। बताते चलें कि वर्ष 2016 में बच्चों को विद्यालय से जोड़ने का अभियान चलाया गया था। ड्रॉप-आउट बच्चों को विद्यालय से जोड़ना था। उक्त अभियान के तहत सभी विद्यालय ने अपनी पंजी में दिखाया कि लक्ष्य के अनुरूप उनके विद्यालय में शत प्रतिशत बच्चों को विद्यालय से जोड़ा गया है। अब इस नई व्यवस्था से उनके आंकाड़ों की सच्चाई पर से भी पर्दा डठ जाएगा।
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सरकारी स्कूल में नाम और पढ़ाई निजी में : वैसे छात्र, अभिभावक व विद्यालय के शिक्षक जो सरकारी लाभ की लालच में बच्चों का नाम सरकारी स्कूल में व पढ़ाई निजी स्कूल में कराते हैं उन पर भी कार्रवाई होगी। कुछ पैसा के लोभ में सरकारी स्कूल के शिक्षक ऐसे काम को अंजाम देने का काम कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार यू डायस डाटा अपलोड में कई ऐसे विद्यालय का नाम सामने आया है। लेकिन इस संबंध में विभाग अभी कुछ भी बताने से परहेज कर रहा है। सनद रहे कि जिले में सरकारी विद्यालय में कुल छात्र व छात्राओं की संख्या 1,28000 हजार और निजी स्कूलों में करीब 44000 है।
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बच्चों की उपस्थिति दिखा कर किया जाता घपला : एमडीएम से लेकर अन्य सुविधाओं की विद्यालय में बंदरबाट की जाती है। बच्चों की उपस्थिति दिखा कर राशि का गबन करने की शिकायत मिलती रहती है। बताया जाता है कि सरकारी की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री लक्ष्मी विद्या योजना व मुख्यमंत्री लाडली योजना का लाभ पाने के लोभ में बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूल में करा कर उसे निजी स्कूलों में पढ़ाने का भी काम किया जाता है। इसके एवज में विद्यालय के शिक्षक को बच्चों के अभिभावक से कुछ मिलता भी है।
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वर्जन
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अभी यू डायस का कार्य चल रहा है। इस दौरान अगर ऐसी बात सामने आती है तो पहले विद्यालय को नोटिस दी जाएगी कि वे बच्चे का नाम विद्यालय से काटकर किसी एक स्कूल में बच्चे को पढ़ाने की व्यवस्था करें। अगर ऐसा नहीं होता है तो विद्यालय के शिक्षक पर कार्रवाई की जाएगी।
- अभय शंकर, जिला शिक्षा अधीक्षक, जामताड़ा
इसमें बच्चों का आधार नंबर भी शामिल होगा। ऐसे में यूनिक आईडी नंबर से एक स्कूल के बच्चे का नाम अगर दूसरे स्कूल में है तो इसकी कलई खुलेगी ही उपस्थिति के फर्जीवाड़े की पोल खुलना तय माना जा रहा है। बताते चलें कि वर्ष 2016 में बच्चों को विद्यालय से जोड़ने का अभियान चलाया गया था। ड्रॉप-आउट बच्चों को विद्यालय से जोड़ना था। उक्त अभियान के तहत सभी विद्यालय ने अपनी पंजी में दिखाया कि लक्ष्य के अनुरूप उनके विद्यालय में शत प्रतिशत बच्चों को विद्यालय से जोड़ा गया है। अब इस नई व्यवस्था से उनके आंकाड़ों की सच्चाई पर से भी पर्दा डठ जाएगा।
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सरकारी स्कूल में नाम और पढ़ाई निजी में : वैसे छात्र, अभिभावक व विद्यालय के शिक्षक जो सरकारी लाभ की लालच में बच्चों का नाम सरकारी स्कूल में व पढ़ाई निजी स्कूल में कराते हैं उन पर भी कार्रवाई होगी। कुछ पैसा के लोभ में सरकारी स्कूल के शिक्षक ऐसे काम को अंजाम देने का काम कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार यू डायस डाटा अपलोड में कई ऐसे विद्यालय का नाम सामने आया है। लेकिन इस संबंध में विभाग अभी कुछ भी बताने से परहेज कर रहा है। सनद रहे कि जिले में सरकारी विद्यालय में कुल छात्र व छात्राओं की संख्या 1,28000 हजार और निजी स्कूलों में करीब 44000 है।
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बच्चों की उपस्थिति दिखा कर किया जाता घपला : एमडीएम से लेकर अन्य सुविधाओं की विद्यालय में बंदरबाट की जाती है। बच्चों की उपस्थिति दिखा कर राशि का गबन करने की शिकायत मिलती रहती है। बताया जाता है कि सरकारी की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री लक्ष्मी विद्या योजना व मुख्यमंत्री लाडली योजना का लाभ पाने के लोभ में बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूल में करा कर उसे निजी स्कूलों में पढ़ाने का भी काम किया जाता है। इसके एवज में विद्यालय के शिक्षक को बच्चों के अभिभावक से कुछ मिलता भी है।
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वर्जन
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अभी यू डायस का कार्य चल रहा है। इस दौरान अगर ऐसी बात सामने आती है तो पहले विद्यालय को नोटिस दी जाएगी कि वे बच्चे का नाम विद्यालय से काटकर किसी एक स्कूल में बच्चे को पढ़ाने की व्यवस्था करें। अगर ऐसा नहीं होता है तो विद्यालय के शिक्षक पर कार्रवाई की जाएगी।
- अभय शंकर, जिला शिक्षा अधीक्षक, जामताड़ा