धनबाद : झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद् की बात भी निराली है। जिले के
खजाने में पैसे हैं नहीं और शिक्षा विभाग को 15 दिन का समय देते हुए सरकारी
स्कूलों में पढ़नेवालों बच्चों के बीच पोशाक वितरण का निर्देश भी दे डाला।
प्रशासी पदाधिकारी मुकेश कुमार सिन्हा ने डीएसई को पत्र जारी कर शेष
बच्चों को पोशाक उपलब्ध कराते हुए 30 अप्रैल तक प्रतिवेदन एवं उपयोगिता
प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने की बात कही है।
हालत यह है कि अभी तक जिले के
सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे एक लाख 87 हजार 224 छात्रों को पोशाक नहीं मिली
है। 400 रुपये की दर से सभी छात्रों में ड्रेस वितरण के लिए विभाग को सात
करोड़ 48 लाख 89 हजार 600 रुपये की जरूरत है। प्रशासी पदाधिकारी ने डीएसई को
पत्र जारी करते हुए 45 लाख 32 हजार 800 रुपये का आवंटन किया है। हालांकि
यह राशि ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। अभी तक जिले के कुल दो लाख 18
हजार 208 लाभुक छात्रों में से महज 30 हजार 984 छात्रों को ही ड्रेस मिली
है। इसमें झरिया प्रखंड के 22154 और पूर्वी टुंडी के 8830 छात्र शामिल हैं।
स्कूलों में पढ़ने वाले पहली से आठवीं के छात्रों को हर वर्ष पोशाक दी
जाती है। पहली से आठवीं तक के सभी बच्चों को 400 रुपये प्रति बच्के की दर
से दो सेट पोशाक उपलब्ध कराई जानी है।
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छात्रों को नहीं मिलीं पुस्तकें, सत्र शुरू
सरकारी स्कूलों में पहली से सातवीं कक्षा का परिणाम जारी किया जा चुका
है। सोमवार से बिना किताबों के ही नया सत्र भी शुरू हो गया। सिर्फ पोशाक ही
नहीं छात्रों को पुस्तकें भी नहीं मिली हैं। उल्टा विभाग ने पुरानी
किताबों की सूची तलब कर ली है। इस तरह बिन किताब ही छात्र स्कूल पहुंच रहे
हैं। जिले के दो लाख 32 हजार छात्रों को किताब की जरूरत है। स्कूलों में
बच्चों के भविष्य को बनाने के लिए शिक्षकों को जुगाड़ का सहारा लेना पड़ रहा
है। नए सत्र में नामांकित बच्चों को अपने सीनियर छात्रों से किताब माग कर
पढ़ाई करनी पड़ रही है।
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