भंडरा (लोहरदगा) : राज्य में शिक्षा का स्तर में सुधार करने के लिए
झारखंड सरकार सशक्त हो गई है। जिससे लेट से विद्यालय आने वाले और जल्दी
विद्यालय से घर जाने वाले शिक्षकों की परेशानी बढ़ गई है। बायोमीट्रिक
अटेंडेंस का भूत सोशल मीडिया में घूम रहा है।
फर्जी मैसेज वायरल किए जा रहे
हैं। बायोमीट्रिक उपस्थिति दर्ज करने को लेकर भीतर ही भीतर कुछ सरकारी
विद्यालय के शिक्षकों में रोष है तो कुछ शिक्षकों द्वारा विद्यालय में
ई-विद्यावाहिनी की शुरुआत से खुशी भी देखी जा रही है।
इसी क्रम में बुधवार को भंडरा प्रखंड के नाम से एक फर्जी आवेदन प्रखंड
शिक्षा प्रसार के नाम से सोशल मीडिया में वायरल हुआ। इसे पढ़ने के बाद
ग्रामीण इस तरह के फर्जी पत्र को बनाने में किसी न किसी शिक्षक के होने का
अंदेशा लगा रहे है। फर्जी आवेदन में कहा गया है कि आज 19 सितंबर को
विद्यालय में नेट की सुविधा नहीं है। नेट के लिए इमली पेड़ में चढ़ना होगा।
अन्यथा किसी के बिल्डिंग की छत पर ही नेट काम करेगा। ऐसे में मुझे अपना
उपस्थिति दर्ज करने के लिए एक पाली की छुट्टी प्रदान की जाए। जिससे ग्रामीण
अपना-अपना अलग-अलग मंतव्य देकर किसी न किसी शिक्षक द्वारा ही उपस्थिति
दर्ज के नाम से शिक्षा व्यवस्था पर अंगुली उठाने की आशंका जता रहे है। बता
दें कि विद्यालयों की मॉनिट¨रग अब ई-विद्या वाहिनी एप से होनी है। एप
विद्यालय के समस्त क्रियाकलाप की निगरानी ऑनलाइन करेगा। इसके जरिए शिक्षक
और विद्यार्थी बायोमीट्रिक सिस्टम से अटेंडेंस बनाएंगे। मध्याह्न भोजन से
लेकर पठन-पाठन तक की स्थिति की जानकारी उपलब्ध होगी। इसमें कार्यरत
कर्मचारी, शिक्षक, प्रबंध समिति, विद्यार्थी समेत उपलब्ध संसाधन का विवरण
उपलब्ध होगा। जिससे कुछ विद्यालयों के शिक्षक नेटवर्क का बहाना देकर सरकार
के नई ई-विद्यावाहिनी सिस्टम को पसंद नहीं कर रहे है। इधर फर्जी पत्र वायरल
होने के मामले पर प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी सुरेंद्र ¨सह ने कहा कि
इस तरह का कोई भी आवेदन कार्यालय नहीं आया है। साथ ही उन्होंने कहा कि सोशल
मीडिया में वायरल पत्र में प्रखंड भंडरा अंकित जरूर है। पर शिक्षक व स्कूल
का नाम भंडरा प्रखंड में नहीं है। यह पूरी तरह से फर्जी पत्र है। वे इस
मामले की जांच कर दोषी के विरुद्ध कार्रवाई करेंगे।