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ओड़िया भाषी शिक्षकों का हिन्दी स्कूलों में स्थानांतरण किए जाने का किया विरोध

रविवार को उत्कलमणि विद्या मंदिर उच्च विद्यालय कुसुमकुंज में उत्कल दिवस एवं वार्षिकोत्सव मनाया गया। पंडित गोपबंधु दास, गोदावरी मिश्र तथा मधु बाबू की प्रतिमा पर अतिथियों ने माल्यापर्ण किया। मौके पर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष अशोक षाड़ंगी और समाजसेवी डॉ लक्ष्मीकांत महांती ने किया। मौके पर श्री षाड़ंगी ने कहा कि भाषा को लेकर शिक्षा जरूरी है। लेकिन यहां जाति और भाषा में बंट जा रहे हैं। हमें एकजुट होने की जरूरत है। ओड़िसा सरकार के मानदेय पर कार्यरत उड़िया शिक्षकों के मानदेय बढ़ाने को लेकर सरकार और राज्यपाल को पत्र लिखे हैं। वहीं झारखंड को उड़िया किताब मिले, उसके लिए सिलेबस को ओड़िसा सरकार को भेजा गया है। उन्होंने कहा कि प्रखंड के चैनपुर गांव का उड़िया स्कूल आजादी से पहले से है, उसे बेसिक स्कूल बनाने का प्लान किया गया है, लेकिन डीएसई को उस पर विचार करने को कहा गया है। साफ तरीके से कहा गया कि भाषायी विद्यालय को बदलने का कोशिश नहीं करें। उन्होंने कहा कि अधिकारी उड़िया भाषी शिक्षकों से सोतैला व्यवहार करते हैं, उन्हें हिन्दी स्कूल में स्थानांतरण किया जाता है। इस सभी चीजों को लेकर सरकार से संघर्ष किये जा रहे हैं। सरायकेला-खरसावां जिला में वर्ष 2004 को 46 विद्यालय थे। अब अधिकारियों ने सरकार को भेजे रिपोर्ट में शून्य कर दिया है। इन चीजों के लिए एकजुट होने की जरुरत है।

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