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योजना-गैर योजना में फंसा उर्दू शिक्षकों का वेतन

रांची : नवनियुक्त उर्दू शिक्षकों का वेतन योजना-गैर योजना मद में फंस गया है। योजना मद में वेतन की राशि आवंटित नहीं होने से अधिकांश जिलों में उर्दू शिक्षकों को कई माह से वेतन नहीं मिल पा रहा है। पिछले वर्ष राज्य सरकार द्वारा वेतन मद की राशि कम भेजे जाने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।

दरअसल, राज्य सरकार नवनियुक्त उर्दू शिक्षकों का वेतन योजना मद से देती है, जबकि अन्य प्राथमिक शिक्षकों का वेतन भुगतान गैर योजना मद से होता है। पिछले साल राज्य सरकार द्वारा योजना मद में आवंटित राशि से उर्दू शिक्षकों को छह माह का ही वेतन भुगतान हो सका। इसके बाद राशि जिलों को भेजी ही नहीं गई। वहीं, धनबाद, चतरा, पलामू तथा गिरिडीह में राशि तो भेजी गई, लेकिन आवंटन कोड में गड़बड़ी होने के कारण निकासी नहीं हो सकी। इसमें सुधार भी नहीं किया गया। अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के महासचिव राममूर्ति ठाकुर ने शिक्षा सचिव आराधना पटनायक से मिलकर उर्दू शिक्षकों को योजना मद से गैर योजना मद में हस्तांतरित किए जाने की मांग की थी, जिसपर कोई कार्रवाई नहीं हुई। गैर योजना मद में पद हस्तांतरित होने से उर्दू शिक्षकों का भी वेतन भुगतान अन्य शिक्षकों के साथ हो जाता।
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इस साल भी आवंटन नहीं :
राज्य सरकार ने सभी कोटि के शिक्षकों के वेतन की राशि जिलों को भेज दी है, लेकिन योजना मद में होने के कारण उर्दू शिक्षकों के वेतन की राशि नहीं भेजी जा सकी है। उर्दू शिक्षकों का पिछले साल का वेतन बकाया पहले से ही है, इस साल के वेतन वेतन भुगतान में भी देरी हो रही है।
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70 हजार पारा शिक्षकों को भी जनवरी से मानदेय नहीं :

सर्व शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत 70 हजार पारा शिक्षकों को जनवरी माह से ही मानदेय का भुगतान नहीं हो सका है। केंद्र से वेतन की राशि नहीं मिलने से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। हालांकि राज्य परियोजना निदेशक मुकेश कुमार ने इस बाबत पूछे जाने पर केंद्र से संपर्क कर राशि मांगे जाने की बात कही है ताकि पारा शिक्षकों का शीघ्र मानदेय भुगतान हो सके। झारखंड प्रदेश पारा शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष संजय दूबे ने कहा है कि मानदेय नहीं मिलने से पारा शिक्षकों के समक्ष आर्थिक संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। 

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