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अब प्रत्येक वर्ष होगी शिक्षक पात्रता परीक्षा

जागरण संवाददाता, रांची। अभ्यर्थियों के लिए खुशखबरी है। अब प्रत्येक वर्ष शिक्षक पात्रता परीक्षा होगी। इसके लिए स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने नियमावली गठित कर दी है। यह नियमावली पहली बार गठित की गई है।
इसके पूर्व झारखंड प्रारंभिक विद्यालय शिक्षक नियुक्ति नियमावली 2012 में ही शिक्षक पात्रता परीक्षा का प्रावधान था। जिसके तहत यह पात्रता परीक्षा होती थी। अब इसके लिए अलग से झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली 2018 का गठन किया गया है। इसके प्रारूप को प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने गुरुवार को सार्वजनिक किया है।
सार्वजनिक करते हुए इसमें आमजनों से सुझाव व आपत्ति मांगी गई है, ताकि आवश्यक व जरूरत के मुताबिक सुधार किया जा सके। सुझाव व आपत्ति के अनुरूप इसमें आवश्यक सुधार कर अंतिम रूप से इसे लागू किया जाएगा। नई नियमावली में प्रत्येक वर्ष सितंबर-अक्टूबर में परीक्षा आयोजित करने का प्रावधान किया गया है। इस पात्रता परीक्षा पास करने पर अभ्यर्थी राज्य सरकार व झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा संचालित विद्यालय, राज्य सरकार द्वारा सहायता प्राप्त, अनुदानित गैर सरकारी विद्यालय में शिक्षक नियुक्त होने के पात्र होंगे। साथ ही सरकार की ओर से संचालित मान्यता व प्रस्वीकृति प्रदान गैर सरकारी, गैर सहायता प्राप्त और राष्ट्रीय शिक्षा बोर्ड से संबंद्ध व मान्यता प्राप्त वैसे विद्यालय जिन्हें राज्य सरकार द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किए विद्यालयों में नियुक्ति के पात्र होंगे। उल्लेखनीय है कि राज्य में अबतक दो टेट परीक्षा ही हुए हैं। नियमावली बनने से विद्यार्थियों को काफी सुविधा होगी।

परीक्षा में शामिल होने के लिए अहर्ताएं :
टेट परीक्षा में शामिल होने के लिए निदेशालय ने अहर्ता निर्धारित की है। इसमें न्यूनतम 50 फीसद अंकों के साथ उच्चतर माध्यमिक अथवा इसके समकक्ष व प्रारंभिक शिक्षा में द्विवर्षीय डिप्लोमा हो। न्यूनतम 45 फीस अंकों के साथ उच्च माध्यमिक अथवा इसके समकक्ष एवं प्रारंभिक शिक्षा शास्त्र में द्विवर्षीय डिप्लोमा, जो राष्ट्रीय अध्यापक शिखा परिषद विनियमन 2002 के अनुसार प्राप्त किया गया हो। अथवा न्यूनतम 50 फीसद अंकों के साथ उच्चतर माध्यमिक अथवा इसके समकक्ष तथा चार वर्षीय प्रारंभिक शिक्षा शास्त्र में स्नातक अथवा न्यूनतम 50 फीसद अंकों के साथ उच्चतर माध्यमिक अथवा इसके समकक्ष तथा शिक्षा शास्त्र विशेष शिक्षा में द्विवर्षीय डिप्लोमा अथवा स्नातक तथा प्रारंभिक शिक्षा में द्विवर्षीय डिप्लोमा की अहर्ता रखी गई है।
इसके अलावा उच्च प्राथमिक कक्षा के शिक्षकों की नियुक्ति के लिए स्नातक अथवा इसके समकक्ष और प्रारंभिक शिक्षा में द्विवर्षीय डिप्लोमा अथवा न्यूनतम 50 फीसद अंकों के साथ स्नातक अथवा न्यूनतम 45 फीसद अंकों के साथ स्नातक एवं शिक्षा शास्त्र में एक वर्षीय स्नातक बीएड जो इस संबंध में समय-समय पर जारी किए गए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद विनियमों के अनुसार प्राप्त किया गया हो। अथवा न्यूनतम 50 फीसद अंकों के साथ उच्चतर माध्यमिक एवं चार वर्षीय प्रारंभिक शिखा शास्त्र में स्नातक बीएलएड हो। अथवा न्यूनतम 50 फीसद अंकों के साथ उच्चतर माध्यमिक एवं चार वर्षीय बीए, बीएससीएड या बीएएड, बीएससीएड अथवा न्यूनतम 50 फीसद अंकों के साथ स्नातक तथा एक वर्षीय बीएड की अहर्ता हो। अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं विकलांग कोटि के अभ्यर्थियों को न्यूनतम प्राप्तांक में पांच फीसद की छूट दी जाएगी।

प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति नियमावली में भी होगा संशोधन :
प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति नियमावली में भी संशोधन किया जा रहा है। इसमें टेट पास करने के बाद प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति के लिए एक और प्रतियोगिता परीक्षा का प्रावधान किया जा रहा है।
टेट नियमावली के मुख्य बिंदु :
प्रारंभिक विद्यालय : राज्य में संचालित कक्षा एक से कक्षा आठ तक के सभी सरकारी विद्यालय व ऐसे प्रारंभिक विद्यालय जो सरकार द्वारा अंगीकृत गैर सरकारी प्रारंभिक विद्यालय अधिनियम 1976 के तहत अधिग्रहित हैं।
मध्य विद्यालय : वैसे विद्यालय जहां कक्षा एक से आठ तक या कक्षा एक से सात या कक्षा छह से आठ या कक्षा छह से सात की पढ़ाई होती है।
- प्रशिक्षित से तात्पर्य है कि जो मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थान से शिक्षण प्रशिक्षण प्राप्त और उत्तीर्ण हैं।
मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण संस्थान से शिक्षण प्रशिक्षण : नियमावली में उल्लेखित शिक्षक प्रशिक्षण, चाहे वे नियमित रूप से अथवा दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से प्राप्त किए गए हों।
शिक्षक : राजकीयकृत प्रारंभिक विद्यालय का सहायक शिक्षक एवं उर्दू सहायक शिक्षक हैं।
अनुदेश : मध्य विद्यालयों में नियुक्ति संगीत व ललित कला व शारीरिक शिक्षा व स्वास्थ्य और समाजोत्पादक कार्य के अनुदेशक
बच्चे : छह से 14 आयुवर्ग के सभी बालक-बालिकाएं।
प्राथमिक कक्षा : कक्षा एक से पांच।
उच्च प्राथमिक कक्षा : कक्षा छह से आठ।

प्रारंभिक कक्षा: कक्षा एक से आठ।

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