Ranchi : राज्य के प्राईवेट यूनिवर्सिटी कैसे शिक्षा को व्यवसाय बनाए हुए है. झारखंड राय यूनिवर्सिटी उसका एक सटीक उदाहरण है. विवि ने यूजीसी द्वारा प्राईवेट विवि के लिए बनाए गए कई नियमों को ताख पर रखकर चलाई जा रही है. नैक टीम को भी कई गलत जानकारियां दे चुकी है.
फूल टाईम पीएचडी स्काॅलर को एक विभाग का एचओडी बना दिया है, वहीं दूसरी तरफ नैक और यूजीसी दवारा राय यूनिवर्सिटी के परीक्षा विभाग के कार्यप्रणाली पर आपत्ति दर्ज करायी जा चुकी है. उन्होंने प्रश्नपत्र स्वयं बनाने और काॅपी भी स्वयं बनाने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है. यूजीसी के तहत जारी गाईडलाइन के अनुरुप राय विवि कार्य नहीं करता, जिसे नैक की टीम ने फाॅलो करने के आदेश दिये थे.
डिप्टी परीक्षा नियंत्रक के पास इस विवि के परीक्षा विभाग का कमान है. डिप्टी परीक्षा नियंत्रक वेद प्रकाश सिर्फ एमए पास है. हालांकि राय यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक सभ्यसाची चक्रवर्ती हैं पर इनके जिम्मे एडमिशन प्रोसेस भी है, पर परीक्षा विभाग का कमान डिप्टी परीक्षा नियंत्रक वेद प्रकाश के पास ही है. काॅलेज के शिक्षकों और प्रोफेसरों के सामने अपना धौंस जमाए रखने के लिए खुद को दारोगा बताकर उन्हें बात बात पर जेल भेजने की धमकी भी देते रहते हैं.
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क्वेश्चन बैंक तैयार कर डालता है वेबसाईट पर, उसी से पूछा जाता है सवाल
विवि शिक्षा के नाम पर व्यवसाय कर रहा है. ऐसा क्यों कहा जा रहा है. आपको इन बातों से स्पष्ट हो जाएगा. काॅलेज में बच्चों को यह बोलकर नामांकन लिया जाता है कि आप सिर्फ एडमिशन के समय पैसे दें बाकि स्काॅलरशिप से पैसे ले लिये जाएंगे. छात्रों को मिलने वाला स्काॅलरशिप विवि अपने पास जमा करा लेता है. साथ ही परीक्षा के नाम पर सही मायने में दिखावा ही होता है. डिप्टी परीक्षा नियंत्रक पहले शिक्षकों से क्वेश्चन बैंक तैयार कराता है. फिर वेबसाईट पर डालता है, फिर परीक्षा में उसी से प्रश्न पूछे जाते हैं. परीक्षा में फेल बच्चों को भी साईड से असाइनमेंट में पास कर दिया जाता है.
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गढ़वा के बच्चों को तुरंत कर दिया था पास
गढ़वा जिला के कुछ बच्चों ने अपने विधायक के पास ये शिकायत की थी कि राय यूनिवर्सिटी उन्हें जानबुझकर पास नहीं कर रहा है, स्काॅलरशिप लेने के लिए जबरन उन्हें फंसाए हुए है और रिलीज नहीं कर रहा था. इस मामले को बाद में विधायक ने विधानसभा में उठाया था जिसके तुरंत बाद डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ने सभी फेल बच्चों को तुरंत पास कर दिया. सवाल ये उठता है कि अगर सभी बच्चे फेल थे तो अचानक पास कैसे हो गये.
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डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ने उषा मार्टिन यूनिवर्सिटी को दिया था फर्जी पे स्लीप
डिप्टी परीक्षा नियंत्रक वेद प्रकाश की मनमर्जी सिर्फ राय यूनिवर्सिटी के परीक्षा विभाग तक ही नहीं है बल्कि इन्हाेने उषा मार्टिन विवि में काम करने के लिए जो आवेदन दिया था, उसमें गलत पे स्लीप भी जमा किया था. जिसपर बाद में जांच समिति भी बैठाई गयी थी, उषा मार्टिन ने इनपर जालसाजी के आरोप में केस करने की भी बात कही थी. बाद में राय यूनिवर्सिटी ने मामले को सुलझाया था.
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क्या कहता है राय यूनिवर्सिटी प्रबंधन
राय यूनिवर्सिटी के पीआरओ ने बताया कि हमने यूजीसी नियमों के हिसाब से परीक्षा विभाग में सारी नियुक्तियां की है. गढ़वा के बच्चों के मामले में विधानसभा के आदेश के अनुसार काम करेगी राय यूनिवर्सिटी. उषा मार्टिन में फर्जी पे स्लीप देने के मामले में उन्होंने कुछ बताने से इंकार कर दिया.
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