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गोड्डा: AGP कटौती के खिलाफ SKMUSTA के सदस्यों ने काला बिल्ला लगाकर किया काम

गोड्डा/झारखंड:  सरकार की तरफ से AGP कटौती के शिक्षक विरोधी नीति के खिलाफ SKMUSTA की गोड्डा कॉलेज इकाई  के सदस्यों ने शुक्रवार को काला बिल्ला लगाकर काम किया। ये आंदोलन का प्रथम चरण था।

इसके दूसरे चरण में 20 सितंबर को कॉलेज के सभी कामों को करते हुए प्राचार्य कक्ष के सामने धरना दिया जाएगा। विरोध कर रहे शिक्षकों का कहना है कि एक तो सरकार वर्षों से शिक्षकों की बहाली नहीं कर रही है। कई विभागों में वर्षों से एक भी शिक्षक नहीं है। जो शिक्षक कार्यरत हैं उन्हें वर्षों से प्रोन्नति नहीं दी जा रहा है।
जबकि जिस वक्त बिहार-झारखंड अलग राज्य नहीं बने थे तब 1996 में नियुक्त व्याख्याता प्रमोशन पाकर  बिहार में प्रोफेसर हो गए हैं और झारखंड में अबतक असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर ही कार्यरत हैं। 2008 में नियुक्त असिस्टेंट प्रोफेसर को पिछले पांच साल से मिल रहे 7000 रुपये ए जी पी को घटाकर 6000 रुपये और 1996 में नियुक्त शिक्षकों का ए जी पी 8000 रुपये से काटकर 7000 रुपये कर देने का फरमान शिक्षा सचिव द्वारा जारी किया गया है। जबकि अभी 2008 में नियुक्त शिक्षकों को 8000 रुपये ए जी पी मिलना चाहिए था।
बिहार एवं अन्य राज्यों में पीएचडी का पांच इंक्रीमेंट के साथ साथ पुरानी पेंशन व्यवस्था  भी लागू कर दी गयी है। झारखण्ड सरकार कुछ न कुछ बहाना बनाकर यह सुविधा न देकर कुम्भकर्णी नींच में सो रही है।

काला बिल्ला लगाने वाले में डॉ बी एन तिवारी, प्रो पी पी मिश्रा, डॉ स्मिति कुमारी, डॉ शहाबुद्दीन, प्रो मृत्युंजय कुमार दुबे, प्रो अमरेंद्र कुमार झा, डॉ राजेश कुमार चौधरी, डॉ बलभद्र प्रसाद सिंह, डॉ इंदिरा तिवारी, डॉ मनीष कुमार दुबे, डॉ मसूद अहमद, डॉ सरफराज इस्लाम, श्री उमाशंकर दास, डॉ विवेका नन्द सिंह इत्यादि सामिल थे।

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