जमशेदपुर कोल्हान विश्वविद्यालय (केयू) में पीएचडी घोटाले का मामला शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। जानकारी के अनुसार कोल्हान विश्वविद्यालय के अलग-अलग कॉलेजों में सेवा दे रहे दर्जन भर शिक्षकों के पीएचडी की उपाधि अब सवालों के घेर में है।
आरोप है कि इन शिक्षकों ने बिना अवकाश लिए दूसरे विवि से पीएचडी की डिग्री हासिल कर ली है। वहीं, केयू में पीएचडी से जुड़े मामले की भारी-भरकम रिपोर्ट पेश होने के बाद छात्र आजसू ने शिक्षकों की उपाधि के जांच की मांग उठा दी है। छात्र संगठन का कहना है कि सेवा में रहते हुए किसी दूसरे विवि से पीएडी की डिग्री कैसे ली जा सकती है। अगर एेसा है तो उसकी जांच होनी चाहिए।
वहीं केयू ने अपने स्तर से शोध कार्य की पूरी विस्तृत जांच कराई है, लेकिन छात्रसंघ का आरोप है कि शिक्षकों के मामले में भेदभाव हो रहा है। छात्र संगठन का आरोप है कि विवि के बीएड संवर्ग के अंतर्गत सेवा देने वाले एक प्राइवेट शिक्षक ने विवि के करीब दर्जन भर स्थायी शिक्षकों से लाखों रुपए की वसूली कर पीएचडी की डिग्री बिहार के एक विश्वविद्यालय से दिलवाई है। इस पूरी प्रक्रिया में संबंधित शिक्षकों ने विवि को जरूरी जानकारियां नहीं दी हैं।
2009 के बाद डिग्री लेने वाले शिक्षकों पर है आरोप
छात्र आजसू ने विवि के अलग-अलग कॉलेजों में वर्ष 2009 के बाद शोध करने वाले दर्जनों शिक्षकों की पीएचडी की जांच की मांग की है। इसमें कहा गया है कि संबंधित शिक्षकों को पीएचडी के बदले लाभ देने से पूर्व विवि सुनिश्चित करे कि उन्होंने पूरी प्रक्रिया का पालन करते हुए ही पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है। विवि जांच कराए कि पीएचडीधारी शिक्षकों ने अपना शोध करने के लिए विवि से अवकाश लिया अथवा नहीं। इस संबंध में पूछे जाने पर विवि की कुलपति डॉ. शुक्ला मोहंती ने कहा कि विवि का रवैया सबके लिए एक समान है। अगर शिकायत के पर्याप्त आधार मिलते हैं तो इस मामले में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
हम पिछले पांच महीनों से इन शिक्षकों के पीएचडी डिग्री के जांच की मांग कर रहे हैं, लेकिन विवि प्रशासन हमारी मांग की तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। ऐसे में एक बार फिर से हमने इस मामले का उठाया है। इसमें बड़े स्तर पर गड़बड़ी हुई है। हेमंत पाठक, नेता, छात्र आजसू