रांची. झारखंड हाइकोर्ट में बुधवार को पारा शिक्षकों की सेवा को स्थायी
करने काे लेकर दायर याचिकाअों पर सुनवाई हुई. एक्टिंग चीफ जस्टिस डीएन पटेल
व जस्टिस अमिताभ कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया
कि वह केंद्र सरकार को पत्र लिख कर यह पता लगाये कि यदि पारा शिक्षकों की
सेवा स्थायी की जाती है, तो क्या वह 60 प्रतिशत राशि उपलब्ध करायेगी.
इस संबंध में केंद्र से कोई बातचीत की गयी है. वह आर्थिक सहायता करेगी या नहीं.
जानकारी लेकर कोर्ट को अवगत कराने का निर्देश दिया गया. खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 जनवरी की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व राज्य सरकार की अोर से अपर महाधिवक्ता जय प्रकाश ने खंडपीठ को बताया कि प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति में टेट उत्तीर्ण पारा शिक्षकों को 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया गया है. इससे अधिक पारा शिक्षकों को नहीं दिया जा सकता है. स्कूलों में अधिक से अधिक बच्चे पढ़ें. पढ़ाई की गुणवत्ता बरकरार रहे. केंद्र के सर्वशिक्षा अभियान के तहत राज्य सरकारा ने पारा शिक्षकों की नियुक्ति की है.
स्थापना मद में 60 प्रतिशत राशि केंद्र देती है आैर 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन करती है. वहीं, केंद्र सरकार की अोर से खंडपीठ को बताया गया कि पारा शिक्षकों के स्थायीकरण होने से वह राज्य सरकार के कर्मी होंगे. उनका खर्च वहन करना राज्य सरकार की जिम्मेवारी होगी. प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखा. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी सुनील कुमार यादव व अन्य की अोर से अलग-अलग याचिका दायर की गयी है.
इस संबंध में केंद्र से कोई बातचीत की गयी है. वह आर्थिक सहायता करेगी या नहीं.
जानकारी लेकर कोर्ट को अवगत कराने का निर्देश दिया गया. खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 11 जनवरी की तिथि निर्धारित की. इससे पूर्व राज्य सरकार की अोर से अपर महाधिवक्ता जय प्रकाश ने खंडपीठ को बताया कि प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति में टेट उत्तीर्ण पारा शिक्षकों को 50 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया गया है. इससे अधिक पारा शिक्षकों को नहीं दिया जा सकता है. स्कूलों में अधिक से अधिक बच्चे पढ़ें. पढ़ाई की गुणवत्ता बरकरार रहे. केंद्र के सर्वशिक्षा अभियान के तहत राज्य सरकारा ने पारा शिक्षकों की नियुक्ति की है.
स्थापना मद में 60 प्रतिशत राशि केंद्र देती है आैर 40 प्रतिशत राशि राज्य सरकार वहन करती है. वहीं, केंद्र सरकार की अोर से खंडपीठ को बताया गया कि पारा शिक्षकों के स्थायीकरण होने से वह राज्य सरकार के कर्मी होंगे. उनका खर्च वहन करना राज्य सरकार की जिम्मेवारी होगी. प्रार्थियों की ओर से वरीय अधिवक्ता राजीव रंजन ने पक्ष रखा. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी सुनील कुमार यादव व अन्य की अोर से अलग-अलग याचिका दायर की गयी है.