अनदेखी. नामांकन लेने पर है रोक, फिर भी लेते हैं बच्चों का दाखिला
राज्य में 375 हाइस्कूल ऐसे हैं, जो बिना मान्यता के चल रहे हैं़
उक्त स्कूलों को एक शैक्षणिक सत्र के लिए ही अस्थायी मान्यता मिली थी.
रांची : ज्य में 375 हाइस्कूल बिना मान्यता के चल रहे हैं. इन स्कूलों
को एक शैक्षणिक सत्र के लिए स्थापना अनुमति (अस्थायी मान्यता) मिली थी. एक
शैक्षणिक सत्र के बाद इन स्कूलों को स्थायी मान्यता के लिए आवेदन देना था.
स्थायी मान्यता नहीं मिलने पर स्कूल में आगे नामांकन नहीं लेना था. इनमें
से 267 विद्यालय को वर्ष 2008-09 में झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा
आनन-फानन में स्थापना अनुमति दे दी गयी थी. इन स्कूलों को संबंधित जिला के
जिला शिक्षा पदाधिकारी की अनुशंसा पर स्थापना अनुमति दी गयी है. कई जिलों
में जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा रिपोर्ट देने में काफी गड़बड़ी की गयी.
इनमें से कई स्कूल स्थापना अनुमति की शर्त को पूरा नहीं करते. कुछ स्कूल
तो एक-दो कमरों में चल रहे हैं. शिक्षक की योग्यता भी मापदंड के अनुरूप
नहीं है. इसके बाद इन विद्यालयों से प्रति वर्ष विद्यार्थी मैट्रिक परीक्षा
में शामिल होते हैं. दो साल की मान्यता पर ये स्कूल आठ साल से चल रहे
हैं.
रोक के बाद भी ये बच्चों का नामांकन लेते हैं. सरकार इन्हें तीन बार
अवधि विस्तार दे चुकी है. इसके अलावा कुछ स्कूल बिहार के समय से ही स्थापना
अनुमति पर चल रहे हैं. बिहार के समय से स्थापना अनुमति प्राप्त विद्यालय
को भी सरकार द्वारा नये सिरे से मान्यता लेने को कहा गया है. राज्य गठन
के बाद इन स्कूलों में झारखंड में लगभग 30 स्कूलों को स्थायी मान्यता मिली
है.
जैक को करनी है स्कूलों पर कार्रवाई : स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता
विभाग द्वारा राज्य के सभी स्थापना अनुमति प्राप्त हाइस्कूल व इंटर कॉलेजों
की जांच करायी गयी है. स्कूलों की जांच उपायुक्त के माध्यम से की गयी है.
विभाग से जांच रिपोर्ट झारखंड एकेडमिक काउंसिल को भेज दी गयी है. जांच
रिपोर्ट के आधार जैक को स्कूल-कॉलेजों पर कार्रवाई करने को कहा गया है.
जैक द्वारा अब तक आठ स्कूलों की स्थापना अनुमति समाप्त की गयी है.
ऐसे मिलता है स्कूलों को अवधि विस्तार
स्थायी मान्यता नहीं लेने वाले हाइस्कूल को सरकार द्वारा कई बार
नामांकन नहीं लेने का निर्देश दिया गया है. इसके बाद भी स्कूल प्रति वर्ष
नामांकन ले लेते हैं. जब मैट्रिक परीक्षा के लिए पंजीयन पर रोक लगायी जाती
है, तो स्कूल छात्र हित के नाम पर आंदोलन करते हैं. छात्रों के भविष्य
बरबाद होने की बात करते हैं. शैक्षणिक सत्र 2016-18 के लिए भी इन स्कूलों
को अपने विद्यालय से परीक्षार्थी को मैट्रिक परीक्षा में शामिल कराने की
अनुमति नहीं है. जैक ने इस संबंध में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग से
दिशा-निर्देश भी मांगा था. विभाग ने जैक से कहा कि स्कूलों को स्थापना
अनुमति जैक द्वारा दी गयी है, इसलिए इस संबंध में जैक ही निर्णय ले.
वर्ष 2013 से फंसा है नियमावली का मामला
राज्य में वर्ष 2008 में हाइस्कूलों को मान्यता देने की नियमावली बनी
थी. स्कूलों ने नियमावली के कुछ प्रावधानों का विरोध किया था. इसके बाद
शिक्षा विभाग ने 2012 में नियमावली में संशोधन के लिए कमेटी बनायी थी.
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट 2013 में शिक्षा विभाग को सौंप दी. इसके बाद से
नियमावली में संशोधन का मामला सरकार के स्तर से लंबित है. स्कूल प्रबंधन
का कहना है कि जब तक नियमावली में संशोधन नहीं होगा, वे स्थायी मान्यता
के लिए आवेदन नहीं देंगे. शिक्षक संघ बिहार के समय से स्थापना अनुमति
प्राप्त विद्यालय के फिर से मान्यता लेने के निर्देश का भी विरोध कर रहे
हैं
स्थापना अनुमति प्राप्त अधिकांश हाइस्कूल मैट्रिक परीक्षा में
विद्यार्थियों को शामिल कराने में गड़बड़ी करते हैं. इस वर्ष बोकारो के
पांच स्कूलों द्वारा गलत तरीके से मैट्रिक परीक्षा लिये विद्यार्थियों का
पंजीयन कराये जाने का मामला पकड़ में आया है. बोकरो, रातू में इंटर की
परीक्षा में उत्तरपुस्तिका बाहर ले जाने का मामला भी स्थापना अनुमति
प्राप्त विद्यालय का ही है. जिन स्थापना अनुमति प्राप्त विद्यालय में
परीक्षा केंद्र बनाया गया है, वहां भी कदाचार का मामला पकड़ में आया है.