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जिले के 124 हाईस्कूलों में महज चार खेल शिक्षक

जमशेदपुर, संवाददाता एक ओर जहां सरकार विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा देने की बात कह रही है, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों के खेलकूद और पीटी को लेकर सरकारी हाईस्कूलों में स्थिति बेहतर नहीं है। हालत तो यह है कि 124 हाईस्कूलों में महज चार खेल शिक्षक कार्यरत हैं।

आमतौर पर सरकारी हाईस्कूलों में खेलकूद खानापूर्ति ही है। बिना खेल शिक्षक स्कूलों में खेलकूद नियमपूर्वक संचालित नहीं हो पाते। आनन-फानन में स्कूल टीमें चयनित होती हैं। यही कारण है कि जिलास्तरीय खेलकूद में भी सरकारी स्कूलों से बेहतर खिलाड़ी सामने नहीं आ पाते।

वर्षों से नहीं हुई नियुक्ति

शिक्षा विभाग में वर्षों से खेल शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। स्थाई शिक्षक के अभाव में हाईस्कूलों में खेलकूद नाममात्र का ही होता है। जबकि, वर्तमान सरकार ने स्कूलों को फुटबाल, टेनिस, वॉलीबॉल समेत खेलों के टीम गठन का आदेश जारी किया है।

खेलकूद से निखरता है व्यक्तित्व

चिकित्सकों की मानें तो खेलकूद, पीटी शिक्षा और व्यक्तित्व विकास का अहम हिस्सा है। खेलकूद से अनुशासन विद्यार्थियों में आता है। वहीं, संपूर्ण विकास विद्यार्थियों का होता है।

खेलकूद के विकास के लिए सरकारी स्कूलों में कवायद हो रही है। खेल शिक्षकों की कमी सरकारी हाईस्कूलों में है। इनकी नियुक्ति भी जल्द सरकार करेगी।

-राजकुमार प्रसाद सिंह, जिला शिक्षा पदाधिकारी, पूर्वी सिंहभूम

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