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Jharkhand Education Department: जमशेदपुर में एक शिक्षक ने लगातार पांच साल तक डेपुटेशन में रहने का बनाया रिकॉर्ड, शिक्षा विभाग का नया कारनामा

 जमशेदपुर, जासं। पूर्वी सिंहभूम जिला का शिक्षा विभाग नित नए कारनामों को लेकर हमेशा राज्य स्तर पर चर्चा में रहता है। इस बार एक नए कारनामे को लेकर राज्य स्तर पर चर्चा में आ गया है। दरअसल विभाग के एक

शिक्षक ने लगातार पांच साल तक प्रतिनियोजन (डेपुटेशन) पर रहकर दूसरे स्कूल में कार्य करने का रिकार्ड बनाया है। इस शिक्षक का नाम है सहायक शिक्षक अनिल कुमार बिहारी। इस शिक्षक की पदस्थापना पटमदा के दिघी मध्य विद्यालय में सहायक शिक्षक के रूप में हुई थी। वहां कुछ दिन तक अपनी सेवाएं देने के बाद शिक्षा विभाग ने उनका प्रतिनयोजन विभाग के ज्ञापांक 374, दिनांक 08-02-2017 द्वारा परसुडीह के गदड़ा स्थित मध्य विद्यालय में कर दिया। तब से वे अब तक इसी विद्यालय में प्रतिनियोजन पर काम करते रहे तथा वेतन पटमदा से उठाते रहे।

शिक्षक ने बनाया पांच साल तक लगातार डेपुटेशन में रहने का रिकार्ड

पिछले दिनों पटमदा के स्कूल के निरीक्षण के क्रम में विधायक मंगल कालिंदी ने जब स्कूल को बंद पाया तो उन्होंने इसकी शिकायत जिला शिक्षा पदाधिकारी से की। इसके बाद विभाग हरकत में आया और वस्तुस्थिति को खंगाला गया। अंतत: विभाग ने 19 अप्रैल को सहायक शिक्षक अनिल बिहारी का प्रतिनियोजन आदेश जिला शिक्षा पदाधिकारी सह प्रभारी जिला शिक्षा अधीक्षक ने तत्काल प्रभाव से रद कर दिया तथा उन्हें अपने मूल विद्यालय में अविलंब योगदान देने का निर्देश दिया। बताया जा रहा है कि इस मामले की जांच भी अब विभागीय स्तर पर होनी है। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंच चुकी है। यह जांच का विषय है कि इस अवधि में कई बार प्रतिनियोजन रद करने का आदेश स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से निकाला जाता रहा। इसके बावजूद जिला शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नजर इस शिक्षक पर कैसे नहीं पड़ी या पड़ी भी तो मामले को चलता कर दिया। इस संबंध में सहायक शिक्षक अनिल बिहारी का पक्ष लेने की कोशिश की गई तो उन्होंने कहा कि इस मामले में वे कुछ नहीं बोलना चाहते।

लगातार पांच साल प्रतिनियोजन गलत : डीईओ

पूर्वी सिंहभूम के जिला शिक्षा पदाधिकारी एसडी तिग्गा ने कहा कि लगातार पांच साल तक कोई भी शिक्षक या कर्मचारी प्रतिनयोजन पर नहीं रह सकता है। हां यह सही है कि आवश्यकतानुार प्रतिनियोजन होता है, लेकिन छह माह या एक साल बाद कार्य समाप्त होते ही पुन: मूल विद्यालय में वापस भेज दिया जाता है। यह हमारी नजर में पहला मामला है जो लगातार पांच साल तक प्रतिनियोजन पर रहा। वर्तमान में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा किसी भी शिक्षक को प्रतिनियोजन पर नहीं रखने का आदेश है।

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