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Para Teacher News: अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों ने कितनी इमानदारी से किया अपना कार्य, इसी आधार पर होगा दो वर्ष का बकाया मानदेय भुगतान

 जागरण संवाददाता, धनबाद: जिले के सरकारी स्कूलों में कार्यरत अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों के कार्यों की शुद्धता से जांच होगी। इन शिक्षकों ने अपना काम कितनी ईमानदारी से किया। इसकी पड़ताल होने के बाद ही पिछले दो वर्ष का बकाया भुगतान किया जाएगा। जुलाई 2019 से लेकर मार्च 2020 और अप्रैल 2020 से लेकर मार्च 2021 तक का बकाया चल रहा है।

यह निर्देश राज्य परियोजना निदेशक शैलेश कुमार चौरसिया ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को दिया है। फिलहाल अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों को इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से लेकर जुलाई तक का चार माह का वेतन दिया जा रहा है। इसको लेकर राजगुरु निदेशक ने जारी अपने पत्र में कहा है कि विधिक परामर्श के आलोक में रखे गए और प्रशिक्षित पर शिक्षकों के लंबित मानदेय का भुगतान किया जाना है।

पिछले वित्तीय वर्षों लंबित मानदेय की गणना कर अलग से राज्य परियोजना निदेशक को जानकारी उपलब्ध कराई जाए। दो वर्षों का बकाया राशि की उपलब्धता के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा। पारा शिक्षकों के कार्यों की शुद्धता से जांच करते हुए वार्षिक कार्य योजना एवं बजट 2020-21 में कार्यरत वास्तविक अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की जानकारी 10 अगस्त तक कार्यालय को उपलब्ध कराएं। इसे पीएफएमएस पोर्टल पर भी अपलोड करें। धनबाद में अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की संख्या 400 से अधिक है।

चार माह के बकाए भुगतान का स्वागत, लेकिन पिछला भी दें

झारखंड के 3000 से अधिक अप्रशिक्षित, एनसी पारा शिक्षकों के बकाया मानदेय भुगतान आदेश का झारखंड राज्य प्रशिक्षित पारा शिक्षक संघ के राज्य इकाई ने स्वागत किया है। जिला महासचिव अशोक चक्रवर्ती ने कहा कि झारखंड राज्य प्रशिक्षित शिक्षक संघ ने राज के अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों की व्यथा को अपनी व्यथा समझते हुए यह लड़ाई जीती है। झारखंड राज्य प्रशिक्षित पारा शिक्षक संघ ने 8 फरवरी 2021 को अप्रशिक्षित पारा शिक्षकों के बकाया मानदेय भुगतान के लिए झारखंड शिक्षा परियोजना निदेशक कार्यालय में एक दिवसीय धरना दिया था। इसके बाद धरना के बाद परियोजना निदेशक शैलेश चौरसिया से वार्ता में भुगतान की सहमति बनी। चार महीने का बकाया भुगतान किया जा रहा है। यह स्वागत योग्य है, लेकिन दो वर्षों का भी बकाया भुगतान जल्द से जल्द किया जाए। पारा शिक्षकों की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है।

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