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झारखंड के 4812 अनट्रेंड पारा शिक्षक नहीं हटाए जाएंगे , याचिका में कहा गया था- हमें मौका मिलना चाहिए

रांची. झारखंड के 4812 अनट्रेंड पारा शिक्षक नहीं हटाए जाएंगे। हाईकाेर्ट ने गुरुवार काे राज्य सरकार के उस आदेश पर राेक लगा दी है, जिसमें इन शिक्षकाें काे हटाने का आदेश जारी किया गया था। सरकार के इस आदेश काे चुनाैती देने वली याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस डाॅ. एसएन पाठक की काेर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

याचिका में कहा गया था- हमें मौका मिलना चाहिए
पारा शिक्षकों को हटाने के सरकार के आदेश के खिलाफ समीर कुमार देव ने हाईकाेर्ट में याचिका लगाई। गुरुवार काे सुनवाई के दाैरान सरकार ने बताया कि केंद्र ने 31 मार्च तक प्रशिक्षण लेने काे कहा गया था। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि हमें माैका मिलना चाहिए। हमने परीक्षा दी है। अभी रिजल्ट आना बाकी है। राज्य सरकार का यह तुगलकी आदेश है। एडवाेकेट राजीव रंजन और पीयूष चित्रेश ने काेर्ट काे बताया कि केंद्र सरकार के आदेश पर एनआईओएस ने असफल पारा शिक्षकाें की पूरक परीक्षा लेने की बात कही है। इन लाेगाें ने अपना रजिस्ट्रेशन भी करा लिया है। जनवरी में परीक्षा हाेनी है। ऐसे में पारा शिक्षकाें काे हटाना असंवैधानिक हाेगा।
कोर्ट ने सरकार के आदेश पर रोक लगाई
इस पर सरकार की ओर से बताया गया कि केंद्र के आदेश के मुताबिक इंटर में 50 फीसदी से कम अंक लाने वालाें काे इंप्रूवमेंट एग्जाम देकर 50 फीसदी से ज्यादा अंक लाना था। एनआईओएस ने इनकी परीक्षा ली है। इनमें कई शिक्षक असफल रहे। इन्हें सरकार ने हटाने का आदेश दिया है। दाेनाें पक्षाें की दलील सुनने के बाद हाईकाेर्ट ने सरकार के आदेश पर राेक लगा दी।

पारा शिक्षक संघर्ष माेर्चा ने कहा-संघर्ष की जीत हुई
एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष माेर्चा के नेता संजय दुबे और प्रद्युम्न सिंह सिंटू ने कहा कि हाईकाेर्ट का फैसला संघर्ष की जीत है। करीब 17 साल तक शिक्षण कार्य कर चुके अनट्रेंड पारा शिक्षकाें की सेवा समाप्ति का सरकार का फैसला अव्यवहारिक था। उन्हें काेर्ट पर पूरा भराेसा था।

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