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रांची : आज भी 2.60 लाख बच्चे स्कूल से बाहर शिक्षा पर खर्च बढ़ाने की जरूरत : सिंह

रांची : ऑक्सफैम व लीड्स द्वारा मंगलवार को झारखंड  में शिक्षा में असमानता पर होटल ली लैक में  कार्यक्रम का आयोजन किया गया. लीड्स द्वारा झारखंड राज्य शिक्षा असमानता रिपोर्ट तैयार की जा रही है,  जिसके लिए कई शिक्षाविद, अर्थशास्त्री व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अपने विचार रखे. यह रिपोर्ट इसी महीने प्रकाशित की जायेगी. 
 
मौके पर अध्ययन की मूल बातें साझा करते हुए एके सिंह ने कहा कि आज भी दो लाख साठ हजार बच्चे विद्यालय से बाहर हैं. विद्यालयाें के विलयन के बाद ड्रापआउट की संख्या बढ़ी है. काफी प्रयास के बाद स्कूल विलय की प्रक्रिया रुकी है. शिक्षा के क्षेत्र में देश के दक्षिणी राज्य बेहतर कर रहे हैं, पर पूर्वी राज्यों में स्थिति ठीक नहीं है. शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना जैसी विषयों में खर्च बढ़ाने की जरूरत है.  
 
आदिवासियों की साक्षरता दर 57, राज्य का औसत 66.41 प्रतिशत : लीड्स के आशुतोष जायसवाल ने राज्य के शिक्षा विभाग के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि राज्य में आदिवासी समुदाय की जनसंख्या लगभग 26 प्रतिशत है और उनकी साक्षरता  दर 57 प्रतिषत है. 
 
जबकि, राज्य का औसत 66.41 प्रतिशत है. 75 प्रतिशत बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं. राज्य में एक चैथाई स्कूल ऐसे हैं, जो  एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं. एलीमेंट्री व सेकेंडरी एजुकेशन में लड़कियों का ड्रापआउट दर लड़कों से ज्यादा है. सामाजिक समूहों में दलित (एसटी) बच्चों का ड्राप आउट प्रतिशत सबसे ज्यादा है. 2016-17 के आंकड़ों के अनुसार विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का प्रतिशत कुल नामांकन का 0.89 प्रतिशत है. 
 
कार्यक्रम में ये लोग थे मौजूद : कार्यक्रम में प्राथमिक शिक्षक संघ के संजय सिंह, अधिवक्ता रेशमा सिंह, सिटिजन फाउंडेशन के गणेश रेड्डी ने भी अपने विचार रखे. 
 

इस दौरान तिरला पंचायत से वार्ड सदस्य विमला डोडराय,  एसएमसी अघ्यक्ष बलराम पंडित,  एकजुट  के प्रत्युष, स्वास्थ्य विभाग की  काननबाला तिर्की, मानस दास, वर्ल्ड विजन के सत्य प्रमाणिक, शंकर दास,  मधुकर, सच्चिदानंद, छंदोश्री, निरक्षरनी रथ, गणेश रवि, सुधीर  पाल, मानस दास व अन्य मौजूद थे.

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