रांची/रमना (गढ़वा) : झारखंड
के 67 हजार पारा शिक्षकों को नियमित करने पर 26 फरवरी को हाइकोर्ट से कोई
बड़ी खबर आ सकती है. उस दिन मुख्य सचिव शपथ पत्र दाखिल कर बतायेंगे कि
सरकार ने पारा शिक्षकों को नियमित करने के लिए क्या नियमावली बनी है या बना
रहे हैं. सरकार के वकील ने कोर्ट को यह सूचित किया.
चीफ जस्टिस अनिरुद्ध बोस एवं रत्नाकर
भेंगरा की डिवीजन बेंच में बुधवार को हुई सुनवाई के बाद याचिका दाखिल करने
वाले पारा शिक्षकों में उत्साह का माहौल है. सुनील कुमार यादव व अन्य बनाम
झारखंड सरकार (केस नंबर 315/2016) के याचिकाकर्ताओं ने कहा कि तीन साल के
दौरान हाइकोर्ट में हुई 40 सुनवाई के बाद सरकार के पास अब कोई बहाना नहीं
बचा है. वह कोर्ट को कई बार गुमराह कर चुकी है.
इससे पहले, पारा शिक्षकों के समायोजन
संबंधी मामले की सुनवाई में सरकारी वकील AAG ने फिर सहमति पत्र का मुद्दा
उठाया. इस पर याचिकाकर्ता के वकील राजीव रंजन ने स्पष्ट किया कि पारा
शिक्षकों के साथ सहमति पत्र का मामला उनके मुवक्किल पर लागू नहीं होता.
उनके मुवक्किल सरकार और पारा शिक्षक संघ के समझौते के पहले से ही कोर्ट की
शरण में हैं.
याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी कहा कि
कोर्ट में इस वक्त जो मामला आया है, उसे सरकार के प्रथम श्रेणी के किसी
पदाधिकारी ने दायर नहीं किया है. 67 हजार पारा शिक्षकों के साथ परियोजना के
द्वितीय श्रेणी के पदाधिकारी State Project Director जयंत मिश्रा ने
समझौता किया है. वह सरकार द्वारा घोषित कार्यक्रम के प्रशासी हैं. वह
पॉलिसी मेकर नहीं हैं.
उधर, जयंत मिश्रा ने IA दाखिल कर आरोप
लगाया कि पारा शिक्षक बायोमेट्रिक हाजिरी नहीं बना रहे हैं. याचिकाकर्ता
के वकील ने इसका पुरजोर विरोध किया. कहा कि उनके मुवक्किल 12 फरवरी के बाद
ही बायोमेट्रिक हाजिरी बनायेंगे, क्योंकि परियोजना निदेशक की ओर से 12
फरवरी को आदेश जारी हुआ है.
मिशन टीम (झारखंड) के प्रदेश महासचिव
सुनील कुमार यादव ने बताया कि सरकार बार-बार हाईकोर्ट को गलत जानकारी देकर
गुमराह कर रही है. यहां बताना प्रासंगिक होगा कि एक बार तो सरकार ने
सर्वशिक्षा अभियान के तहत भर्ती किये गये लोगों की जानकारी माननीय हाइकोर्ट
को देकर गुमराह करने की कोशिश की. श्री यादव ने बताया कि वर्ष 2015 में
पारा शिक्षकों की प्रारंभिक नियुक्ति हुई. नियुक्ति के लिए जो नियमावली बनी
थी, उसे हाइकोर्ट में चुनौती दी गयी.
पारा शिक्षकों की बहाली को अवैध मानने से कोर्ट का इन्कार
17 जनवरी, 2017 को हाइकोर्ट ने सरकार को
नियुक्ति नियमावली बनाने का आदेश दिया. वहीं, 25 जून, 2018 को सरकार को
निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं की सेवा नियमित करे और समान काम का समान
वेतन उन्हें दे. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिका करने वाले पारा
शिक्षकों की नियुक्ति अवैध नहीं है. उनकी नियुक्ति स्वीकृत पद पर हुई है.
बाकायदा विज्ञान निकालकर उनकी बहाली हुई है. स्वीकृत इकाई पर प्रखंड विकास
पदाधिकारी (बीडीओ), प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) और ग्राम शिक्षा समिति
के अनुमोदन पर जिला के उपायुक्त और जिला शिक्षा पदाधिकारी ने उनकी बहाली को
अप्रूव किया है.
अत: इनकी बहाली को किसी भी तरह से
अवैध नहीं कहा जा सकता. श्री यादव ने बताया कि सरकार के खिलाफ व्यक्तिगत
केस को सरकारी वकील ने पारा टीचर संघ के साथ जोड़ने की कोशिश की, लेकिन वे
नाकाम रहे. इस बार उनकी थोथी दलीलों को मानने से हाइकोर्ट ने इन्कार कर
दिया और कहा कि 26 फरवरी को मुख्य सचिव शपथ पत्र दाखिल कर यह बतायें कि
पारा शिक्षकों की सेवा को नियमित करने के लिए सरकार क्या नियमावली बना रही
है.
तीन साल में हाइकोर्ट में 40 बार सुनवाई, 6 आदेश
तीन साल के दौरान हाईकोर्ट में 40 बार
सुनवाई हो चुकी है. कोर्ट ने 6 बार आदेश दिये, लेकिन सरकार की ओर से कोई
संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया. अब उम्मीद जगी है कि 26 फरवरी को पारा
शिक्षकों के लिए अच्छी खबर आ सकती है. उसी दिन हाइकोर्ट अपना अंतिम फैला भी
सुना सकता है. वर्ष 2016 से 2018 के बीच 23 मुकदमे दायर हुए.
गढ़वा के इन लोगों ने दायर की है याचिका
केस संख्या 315/2016 के याचिकाकर्ताओं में
सुनील कुमार यादव, दिलीप कुमार पाठक, प्रदीप राम, संजय प्रसाद यादव, रवि
कुमार गुप्ता, राजेश कुमार गुप्ता, जगत नारायण प्रजापति, खुर्शीद आलम,
मोहम्मद सफीक अंसारी शामिल हैं. ये सभी गढ़वा जिला के रमना और बिशुनपुर
थाना क्षेत्र के जतपुरा, चितरी, सारंग और सिद्धि गांव के रहने वाले हैं.
कब-कब जारी हुए आदेश
20.03.2017 : जस्टिस डीएन पटेल, जस्टिस रत्नाकर भेंगरा
13.06.2016 : जस्टिस डीएन पटेल, जस्टिस रत्नाकर भेंगरा
17.04.2016 : जस्टिस डीएन पटेल, जस्टिस रत्नाकर भेंगरा
27.09.2016 : जस्टिस डीएन पटेल, जस्टिस रत्नाकर भेंगरा
17.01.2017 : जस्टिस डीएन पटेल, जस्टिस रत्नाकर भेंगरा
28.08.2018 : माननीय चीफ जस्टिस, जस्टिस अपरेश कुमार सिंह