बुधवार को शिक्षक दिवस है, लेकिन झारखंड के वित्त रहित शिक्षक और पारा शिक्षकों के
चेहरे सूखे हुए हैं. सूबे के 70 हजार पारा शिक्षकों ने बुधवार को शिक्षक
दिवस के मौके पर किसी भी समारोह में शामिल नहीं होने का फैसला लिया है.
वहीं दस हजार वित्त रहित शिक्षकों ने राजभवन के पास भिक्षाटन करने का फैसला
लिया है.
पारा शिक्षक अपनी स्थायीकरण की मांग को लेकर सरकार द्वारा बनायी गयी समिति के फैसले से नाराज हैं, जबकि वित्त रहित शिक्षकों को इस साल सरकार ने अनुदान देने से मना कर दिया. कुछ स्कूलों को अनुदान मिला भी, तो यह ऊंट के मुंह में जीरा
साबित हुआ.
बुधवार को शिक्षक दिवस के मौके पर जैक सभागार में सरकारी कार्यक्रम का
आयोजन किया जाएगा. इस कार्यक्रम में सरकारी शिक्षकों को सम्मानित किया
जायेगा. साथ ही शिक्षकों के हित में कई प्रकार की घोषणा की जाएंगी. वित्त
रहित शिक्षकों के बुधवार को प्रस्तावित भिक्षाटन कार्यक्रम पर शिक्षा
मंत्री नीरा यादव ने कहा कि इससे राज्य की छवि खराब होगी. उन्होंने इस
घोषणा को वापस लेने की मांग वित्त रहित शिक्षकों से की है.
गौरतलब
है कि राज्य गठन के बाद से अबतक ना तो वित्त रहित शिक्षा नीति पर कुछ
फैसला हो पाया और ना ही पारा शिक्षकों पर सरकार कोई निर्णय ले पाई है.