रांची, राज्य ब्यूरो। राज्य में सर्व शिक्षा अभियान के तहत कार्यरत पारा
शिक्षकों को अभी अप्रैल-मई का ही मानदेय मिल पाएगा। इन्हें पांच माह से
वेतन नहीं मिला था। अब झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद द्वारा इनके दो माह के
मानदेय भेजा जा रहा है। हालांकि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के
प्रधान सचिव एपी सिंह ने शीघ्र ही शेष माह का मानदेय भी जारी करने का
आश्वासन पारा शिक्षकों को दिया है।
इससे पहले, एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने
प्रधान सचिव से मिलकर शेष मानदेय की राशि भी शीघ्र जारी करने तथा इसे
नियमित करने की गुहार लगाई। पारा शिक्षकों ने स्कूलों के विलय के क्रम में
शिक्षकों के किए जा रहे रेशनलाइजेशन (स्कूलों में आवश्यकता के अनुसार
पदस्थापन) में जिला शिक्षा अधीक्षकों द्वारा पारा शिक्षकों को 30 से 50
किमी दूर के स्कूलों में पदस्थापन कर देने की शिकायत की।
मोर्चा के पदाधिकारियों के अनुसार, उनका पदस्थापन दूसरी पंचायतों में
नहीं किया जा सकता क्योंकि उनकी नियुक्ति ग्राम सभा द्वारा हुई है। प्रधान
सचिव ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग में ऐसा नहीं करने को लेकर जिला शिक्षा
अधीक्षकों को निर्देश देने का आश्वासन दिया।
पारा शिक्षकों ने पश्चिमी सिंहभूम में टेट पास पारा शिक्षकों को टेट
पास का मानदेय नहीं दिए जाने को लेकर जिला शिक्षा अधीक्षक द्वारा आदेश
निकाले जाने की जानकारी प्रधान सचिव को दी। इस पर प्रधान सचिव ने आवश्यक
कार्रवाई का आश्वासन दिया।
बता दें कि टेट प्रमाणपत्र की मान्यता पांच साल की ही थी जो खत्म हो
गई। प्रतिनिधिमंडल में संजय दूबे, ह्रषिकेश पाठक, बजरंग प्रसाद, सिंटू सिंह
आदि शामिल थे।
स्थायीकरण पर कमेटी ने नहीं सौंपी रिपोर्ट : मोर्चा ने पारा शिक्षकों
के स्थायीकरण को ले मुख्य सचिव के निर्देश पर गठित उच्च स्तरीय कमेटी
द्वारा अभी तक रिपोर्ट नहीं सौंपे जाने का मामला उठाया। कहा गया कि कमेटी
को 60 दिनों में रिपोर्ट देनी थी, जिसे दस दिनों का विस्तार भी मिला। इसके
बावजूद तीन माह बीत जाने पर भी रिपोर्ट नहीं सौंपी गई।