राज्य सरकार ने 3.56 लाख नियोजित शिक्षकों को समान काम समान वेतन देने में
फिर हाथ खड़े कर दिए। सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को 12 मिनट ही सुनवाई हुई।
बुधवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
राज्य सरकार ने कोर्ट से फिर एक बार कहा-हमारी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं
है कि नियोजित शिक्षकों को अधिक वेतन दे सके। न्यायाधीश एएम सप्रे और यूयू
ललित की खंडपीठ में यह सुनवाई चल रही है। इसके पहले 31 जुलाई, एक अगस्त और
दो अगस्त को भी सुनवाई हुई थी। कोर्ट में सरकार ने आंकड़ा रखा कि हर पंचायत
में एक हाईस्कूल की स्थापना की जा रही है। मध्य विद्यालयों को हाईस्कूल में
उत्क्रमित किया जा रहा है। सभी हाईस्कूल को प्लस टू स्कूल में तब्दील किया
गया। इन स्कूलों के लिए विभिन्न नियोजन इकाइयों के माध्यम से शिक्षक रखे
गए हैं। सरकार लगातार नियोजित शिक्षकों के वेतन में बढ़ोतरी कर रही है।
शिक्षकों के वर्तमान वेतन में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी के लिए सरकार तैयार है।
सरकार ने कोर्ट से कहा है कि पुराने नियमित शिक्षकों के रिटायरमेंट के
साथ ही पद भी समाप्त किया जा रहा है। सरकार लगातार कोर्ट में तर्क दे रही
है कि नियोजित शिक्षक सरकारी कर्मी नहीं हैं।