प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के तबादले पर रोक है। गृह
प्रखंड में तबादला से संबंधित डिमांड का आश्वासन के बाद भी अब तक निष्पादन
नहीं हुआ है।
वहीं दूसरी ओर रैशनलाइजेशन (यूक्तिकरण) के नाम पर प्राथमिक
शिक्षकों का दूर दराज के स्कूलों में स्थानांतरण किया जा रहा है। इसका
झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ ने विरोध किया है।
रविवार को संघ के अध्यक्ष बिजेंद्र चौबे, महासचिव राममूर्ति ठाकुर और
मुख्य प्रवक्ता नसीम अहमद ने बताया कि रैशनलाइजेशन के नाम पर शिक्षकों को
परेशान करने का खेल शुरू हो गया है। शिक्षा सचिव के निर्देश के अनुसार
सिर्फ मर्जर स्कूलों के शिक्षकों का रैशनलाइजेशन किया जाना है। लेकिन केवल
जामताड़ा जिले के 900 में से 511 प्राथमिक शिक्षकों को तबादला किया जा रहा
है। जबकि कुछ माह पहले ही प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने स्थानांतरण नियमावली
बनने तक प्राथमिक शिक्षकों के तबादले पर रोक लगा दी थी। जल्दबाजी में
सेवानिवृत्त शिक्षकों का भी स्थानांतरण कर दिया गया है।
शिक्षकों का नहीं हो रहा अंतर जिला स्थानांतरण
प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पत्र के आलोक में शिक्षकों का गृह जिला
स्थानांतरण नहीं हो पा रहा है। रोक के बाद रैशनलाइजेशन के नाम पर
स्थानांतरण कर शिक्षकों को प्रताड़ित किया जा रहा है। नसीम अहमद ने कहा कि
रैशनलाइजेशन के नाम पर विभागीय अधिकारियों की शिक्षक विरोधी छवि सामने आई
है। इस तबादले को निरस्त नहीं किया गया, तो प्राथमिक शिक्षक उग्र आंदोलन
करेंगे, जिसके लिए विभागीय अधिकारी जिम्मेवार होंगे।
दिव्यांग शिक्षकों का भी तबादला में नहीं रखा ध्यान : रैशनलाइजेशन के
नाम पर दिव्यांग शिक्षकों का भी ख्याल नहीं रखा गया है। संघ के मुख्य
प्रवक्ता ने कहा कि सेवानिवृत्त होने में जिन शिक्षकों का बहुत कम दिन शेष
रह गया है, उनका भी 40-50 किलोमीटर दूर तबादला किया गया है। ऐसे शिक्षकों
की संख्या 10 है। दिव्यांग व हृदय रोग से पीड़ित शिक्षकों का स्थानांतरण
किया गया है। ऐसे शिक्षकों की संख्या 20 है। सचिव व निदेशक से मिलकर शीघ्र
ही इस समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट कराएंगे।