एजुकेशन रिपोर्टर | जमशेदपुर
धनबाद के प्रारंभिक स्कूलों में हुई शिक्षक नियुक्ति में गड़बड़ी के
मामले में वहां के पूर्व व पूर्वी सिंहभूम के वर्तमान जिला शिक्षा अधीक्षक
(डीएसई) बांके बिहारी सिंह पर लगे आरोपों की मंगलवार को जांच की गई। इसके
लिए विभाग के संयुक्त सचिव देवेंद्र भूषण सिंह की अध्यक्षता में तीन
सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी।
इसको लेकर उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के आरडीडीई और धनबाद से डीईओ डॉ
माधुरी कुमारी को बुलाया गया था। इसके अलावा डीएसई ऑफिस के संबंधित लिपिक
को संचिका के साथ आने का आदेश दिया गया था। इस दौरान प्रपत्र ‘क’ में गठित
आरोपों से मूल दस्तावेजों का मिलान किया गया, जिसमें कुछेक बिंदुओं का
मिलान नहीं हो सका। अब रिपोर्ट पर निर्णय के लिए विभाग के प्रधान सचिव एपी
सिंह के पास भेजा जाएगा। वहीं धनबाद के 156 प्रारंभिक स्कूलों में कथित तौर
पर हुई चापाकल घोटाले की जांच 27 अप्रैल को होगी। इस दिन पेयजल एवं
स्वच्छता विभाग के कनीय अभियंता को बीआरसी बाघमारा में मौजूद रहने का आदेश
दिया गया है। आरोप है कि वर्ष 2013-14 में स्कूलों में रात के अंधेरे में
चापाकल लगवाए गए थे। कितनी बोरिंग हुई इसकी जानकारी भी स्कूलों को नहीं दी
गई और भुगतान करा दिया गया।
डीएसई को नहीं, जांच अधिकारी को दूंगा सबूत : सिंह
शिक्षक नेता रामनारायण सिंह ने जिला शिक्षा कार्यालय द्वारा जारी
शोकॉज नोटिस का जवाब विभाग को सौंप दिया है। अपने चार पन्ने के जवाब में
उन्होंने डीएसई के खिलाफ लगाए गए आरोपों का सबूत देने से विभाग को इनकार कर
दिया है। उन्होंने कहा कि चूकिं डीएसई खुद इन मामलों में आरोपी हैं। ऐसे
में उनके अंतर्गत आने वाले विभाग को आरोपों का सबूत नहीं दिया जा सकता है।
जो भी सबूत देना है वे जांच पदाधिकारी को ही देंगे, ताकि इस मामले में
निष्पक्ष जांच हो सके। मामूल हो शिक्षक नेता ने डीएसई के खिलाफ तीन शिकायत
मुख्यमंत्री जनसंवाद व पीएमओ में की है। इसमें डीएसई पर कई गंभीर आरोप
लगाते हुए जांच कराने की मांग की है। इसके बाद विभाग ने इस मामले को
अनुशासनहीनता मानते हुए शिक्षक नेता को शोकॉज जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था।
साथ ही पूछा था कि किस सबूत के आधार पर उन्होंने अपने अधिकार से बाहर जाते
हुए अधिकारी की शिकायत की है।
पहले की जांच में डीएसई को मिल चुकी है क्लीनचिट
डीएसई बांके बिहारी सिंह पर शिक्षक नियुक्ति व चापाकल घोटाले के
आरोप की जांच हो रही है। दोनों मामलो में पूर्व हुई जांच में उन्हें
क्लीनचिट मिल चुका है। चापाकल घोटाले में उनकी भूमिका को पूर्व में गठित
जांच कमेटी ने खारिज कर दिया है। लेकिन शिक्षा सचिव बदलने और कुछ शिक्षक
नेताओं द्वारा इसकी पुन: शिकायत करने के बाद दोनों मामलों की फिर से जांच
कराई जा रही है।