राज्य के एफिलिएटेड (स्थापना अनुमति प्राप्त) हाई स्कूलों और इंटर कॉलेजों
के शिक्षकों के लिए बीएड की अर्हता को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके विरोध
में इन संस्थानों के शिक्षक आंदोलन कर रहे हैं।
झारखंड वित्त रहित शिक्षा
संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले बुधवार को शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल
प्रधान सचिव एपी सिंह से मिला। समस्याओं की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। कहा कि
इन अनुदानित स्कूलों में शिक्षकों की वर्ष 2005 से पहले नियुक्ति हुई थी।
अब नया नियम थोपा जा रहा है। अधिकांश शिक्षकों की दो से पांच वर्ष सेवा
बची हुई है। शिक्षकों के पास 15 वर्ष का शैक्षणिक अनुभव है। इसलिए, बीएड
अनिवार्यता समाप्त की जाए। प्रधान सचिव ने कहा कि इस मामले में विधि विभाग
से ओपिनियन लिया जाएगा। इसके बाद समुचित निर्णय लिया जाएगा। वार्ता में
रघुनाथ सिंह, डॉ. देवनाथ सिंह, कृष्ण मुरारी, नरोत्तम सिंह, विजय झा समेत
अन्य थे।
स्कूली शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव और शिक्षकों के बीच बातचीत में बनी सहमति
छात्र संख्या बढ़ाने से संबंधित पत्र का होगा सत्यापन
शिक्षकों ने कह कि एफिलिएटेड इंटर कॉलेजों और हाई स्कूलों को
अनुदान मद में राशि देने के लिए छात्रों की संख्या के आधार शिक्षा विभाग
द्वारा स्लैब बनाया गया था। अब कहा जा रहा है कि 512 छात्रों की संख्या को
आधार पर ही स्कूलों को अनुदान राशि दी जाएगी। शिक्षकों ने प्रधान सचिव से
कहा कि छात्र की संख्या जैक की अनुमति से बढ़ाया गया है।
प्रधान सचिव ने कहा- प्रधान सचिव ने छात्र संख्या बढ़ाने से संबंधित
अनुमति पत्र जमा कराने के लिए कहा है, ताकि उसका सत्यापन कराया जा सके।
एकाउंट में जाएगी अनुदान राशि
स्कूली शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव को शिक्षक प्रतिनिधियों ने
बताया कि डीईओ के माध्यम से इंटर कॉलेज और हाई स्कूल अनुदान मद की राशि
नहीं लेंगे। क्योंकि, अधिकांश डीईओ कार्यालय में भ्रष्टाचार है।
प्रधान सचिव ने कहा- जिन विद्यालयों में गवर्निंग बॉडी है और एकाउंट का
संचालन अध्यक्ष व सेक्रेट्री के माध्यम से होता है, संबंधित स्कूलों को
डीईओ के माध्यम से नहीं, सीधे एकाउंट में राशि भेजी जाएगी।
रांची जिला का अनुदान फाॅर्म नहीं भेजा गया
विभागीय सचिव को मोर्चा के प्रतिनिधियों ने बताया कि रांची जिला
में 52 अनुदानित स्कूल हैं। स्कूलों द्वारा समय पर आवेदन जमा कर दिया गया
था। लेकिन, जिला शिक्षा पदाधिकारी की लापरवाही के कारण अनुदान का आवेदन
नहीं भेजा जा सका है। इससे कई काम प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि
लगातार जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा लापरवाही बरती जा रही हैञ।
प्रधान सचिव ने कहा- किसी भी स्कूल का अनुदान राशि प्रभावित नहीं होगा।
क्योंकि, इसमें स्कूल की गलती नहीं है। यह गंभीर मामला है। उन्होंने कहा
कि नियमानुसार संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी।