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पारा शिक्षकों के वेतन का फैसला मुख्यमंत्री स्तर पर ही होगा

झारखंड में पारा शिक्षकों के समान काम के लिए समान वेतन की मांग प्रशासनिक आश्वासनों के मकड़जाल में फंस गई. हजारों की संख्या में रांची में शिक्षा मंत्री का आवास घेरने आए पारा शिक्षकों को पंद्रह दिन और इंतजार करना पड़ेगा. लिहाजा अधिकारियों के आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित हो गया.
आरंभ में इन पारा शिक्षकों का पारा गरम था. लेकिन फिर धीरे-धीरे ठंडा पड़ा गया. मुख्यमंत्री स्तर से ही यह मांग पूरी हो सकती है.

शनिवार को एक बार फिर राजधानी की सड़कों पर बड़ी संख्या में पारा शिक्षक उतरे. इस बार शिक्षा मंत्री नीरा यादव के आवास का घेराव करने का कार्यक्रम था. हजारों की संख्या में प्रदेश के विभिन्न जिलों से  पारा शिक्षक आर-पार की लड़ाई के मूड में आए थे. समान काम के लिए समान वेतन और स्थायीकरण की मांग को लेकर इनका यह आंदोलन था. विधानसभा मैदान से पारा शिक्षकों को धुर्वा सेक्टर फोर जाना था जहां नीरा यादव का सरकारी आवास है. इनके गरम तेवर को देखते हुए प्रशासन ने इन्हें रोकने का पूरा इंतजाम कर रखा था.

प्रशासन की ओर से एसडीओ अमिता यादव सुलह का रास्ता निकालने की कोशिश में लगी रहीं. पारा शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की गई. शिक्षा विभाग के आला अधिकारी से बात कराने की कोशिश हुई. पर, सभी मुख्यालय से बाहर थे. ऐसे में पारा शिक्षकों का पारा थोड़ा ठंडा पड़ गया. अंत में एसडीओ के आश्वासन के बाद घेराव का इरादा स्थगित कर दिया गया.

बता दें कि पारा शिक्षकों के कई गुट हैं. लेकिन सभी गुट इस आंदोलन में एकजुट हो गए थे. वजह थी एक बड़ी मांग. समान काम के लिए समान वेतन. पारा शिक्षकों की मांग के लिए पूरी सरकार को नीतिगत फैसला लेना होगा. वह भी मुख्यमंत्री के स्तर पर. ऐसे में पारा शिक्षकों को और इंतजार करना पड़ेगा. इनके अनुसार कई राज्यों ने मानदेय की राशि काफी बढ़ा दी है. यहां यह आठ से दस हजार रुपये है. प्रशासन को भी सुबह से ही काफी मशक्कत करनी पड़ी. एसडीओ ने किसी तरह इन्हें समझाया और ऊपर तक उनकी मांग को रखने का आश्वासन दिया.

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