रांची : स्लैब के अनुसार अनुदान की राशि नहीं देने के विरोध में झारखंड
राज्य वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के करीब 20 हजार शिक्षक व
शिक्षकेतर कर्मचारियों ने सोमवार को काला बिल्ला लगाकर आक्रोश व्यक्त किया।
मोर्चा के रघुनाथ सिंह, डॉ. सुरेंद्र झा व हरिहर प्रसाद कुशवाहा ने
संयुक्त रूप से कहा कि हाईस्कूलों और इंटर कॉलेजों को अनुदान मद में राशि
देने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा स्लैब बनाया गया है, जिसका आधार संबंधित
संस्थान में पढ़ रहे छात्रों की संख्या है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता
विभाग अपने ही नियम को नहीं मान रहा है। इन्होंने कहा कि विभाग कह रहा है
कि प्रत्येक इंटर कॉलेज के कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय में 512-512
छात्रों को आधार मानकर अनुदान राशि दी जाएगी, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने जैक
की अनुमति से छात्र हित में अधिक नामांकन लिए हैं। ऐसे में छात्रों की
संख्या व तय स्लैब के अनुसार अनुदान मिले।
आज लटकेगा ताला
मोर्चा ने कहा कि स्लैब के अनुसार अनुदान राशि नहीं देने और शिक्षकों
के लिए बीएड की अनिवार्यता के विरोध में मंगलवार को राज्य के सभी मान्यता
प्राप्त उच्च विद्यालयों व इंटर कॉलेजों में ताला लटका रहेगा। 16 मार्च को
राजभवन के समक्ष मांगों के समर्थन में धरना देंगे। जब तक मांगें नहीं मानी
जाती तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
यह है अनुदान का स्लैब
छात्रों की संख्या- अनुदान की राशि
250-500- 16.80 लाख रुपये
500-1000- 21.60 लाख रुपये
1000-1500- 28 लाख रुपये
2000 से अधिक- 60 लाख रुपये
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अनुदान के लिए मिले हैं 93 करोड़
वित्तीय वर्ष 2017-18 में इंटर कॉलेजों और हाईस्कूलों को अनुदान मद में
93 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें इंटर कॉलेजों के लिए 60.25 करोड़,
उच्च विद्यालयों के लिए 28 करोड़, मदरसा के लिए 80 लाख व संस्कृत विद्यालय
के लिए एक करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। रघुनाथ सिंह ने कहा कि सरकार
अनुदान अधिनियम 2004 की अनदेखी कर रही है।
डीईओ कार्यालय में भ्रष्टाचार, नहीं लेंगे अनुदान
मोर्चा ने कहा कि वे जिला शिक्षा पदाधिकारी से किसी भी स्थिति में
अनुदान नहीं लेंगे। कारण, अधिकतर जिलों के डीईओ कार्यालय में भ्रष्टाचार
व्याप्त है। अनुदान की राशि पहले की तरह दी जाए। डीईओ के माध्यम से अनुदान
लेने में शिक्षण संस्थानों को कठिनाई होगी। इन्होंने कहा कि सीबीएसई के
अनुसार यदि किसी शिक्षक 15 वर्षो तक अप्रशिक्षित शिक्षक के तौर पर शिक्षण
कार्य किया है तो वे सभी सुविधाओं के हकदार होंगे। इन्हें प्रोन्नति भी दी
जाएगी। यानि 15 वर्षो के शैक्षणिक अनुभव रखने वालों को बीएड प्रशिक्षित
होना जरूरी नहीं है, लेकिन इस मामले में विभाग अनुदानित शिक्षण संस्थानों
को परेशान कर रहा है। यहां कार्यरत शिक्षक अनुदान नहीं मिलने की स्थिति में
क्या करेंगे, विभाग को इसकी चिंता नहीं है।