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वेतन आयोग के मामले में शिक्षकों से धोखा: महासंघ

नई दिल्ली। अखिल भारतीय विश्वविद्यालय एवं कालेज शिक्षक महासंघ ने शिक्षकों के नए वेतनमान के संबंध में मानव संसाधन विकास विभाग द्वारा गुरुवार को जारी अधिसूचना को शिक्षकों के साथ धोखा करार दिया है
और कहा है कि सरकार ने चौहान समिति की रिपोर्ट को सार्वजानिक न करके शिक्षकों को अंधेरे में रखा है।
महासंघ के अध्यक्ष केशव भट्टाचार्य और महासचिव अरुण कुमार द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि 11 अक्टूबर को सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की घोषणा की थी और अब दो नवंबर को इसकी अधिसूचना जारी की गयी जिससे सरकार के इरादे और रवैये का पता चलता है। अधिसूचना के अनुसार एम फिल, पीएचडी कर चुके शिक्षकों को कोई प्रोत्साहन राशि नहीं दी जायेगी। इससे पता चलता है कि सरकार की नज़र में शोध कार्यों का कोई महत्त्व नहीं है और शिक्षकों की मेहनत का कोई मोल नहीं है। इतना ही नहीं उसने प्रिंसिपल को एसोसिएट प्रोफेसर्स के समकक्ष पद माना है जिससे प्रिंसिपल पद का अवमूल्यन होता है।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि अधिसूचना के अनुसार प्रिंसिपल के विशेष भत्ते में भी कोई वृद्धि नहीं की गयी है। इसके अलावा केंद्र द्वारा राज्यों को केवल 50 प्रतिशत अनुदान देने की बात कही गयी है इससे राज्य सरकार अपने यहां शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग के अनरूप वेतन नहीं दे पायेगी।

महासंघ ने कहा है कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों को चोरी छिपे लागू करने के लिए ही सरकार ने चौहान समिति की रिपोर्ट को सार्वजानिक नहीं किया। महासंघ ने राज्यों को सौ प्रतिशत अनुदान देने और अधिसूचना की अनियमितताओं को दूर करने की मांग की है।

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