रांची : मैट्रिक व इंटर का वार्षिक परीक्षाफल खराब होने के बाद शिक्षा
विभाग की नींद खुलती है। वर्ष 2018 में मैट्रिक व इंटर के रिजल्ट की बेहतरी
को लेकर विभाग ने अभी से कवायद शुरू कर दी है। सरकारी विद्यालयों में
शिक्षकों के अभाव को पाटने का प्रयास शुरू हो चुका है।
जिलास्तर पर इसका कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। शिक्षकों की कमी को देखते हुए उच्च विद्यालयों के योग्यताधारी शिक्षकों को प्लस टू उच्च विद्यालयों के विद्यार्थियों को पढ़ाने का निर्देश दिया गया है। उच्च योग्यता वाले ये शिक्षक 11वीं व 12वीं की कक्षाएं भी लेंगे। साथ ही प्लस टू उच्च विद्यालय के शिक्षक उच्च विद्यालयों की नौवीं व दसवीं की कक्षाएं लेंगे। यह नियम सभी उच्च व प्लस टू विद्यालयों के लिए लागू होगा।
जिले में 40 प्लस टू स्कूल
वर्तमान में यह व्यवस्था वहां की जा रही है, जहां उच्च व प्लस टू विद्यालय साथ-साथ संचालित होते हों। ऐसे प्लस टू उच्च विद्यालयों की संख्या जिले में 40 है। वर्तमान समय 17 उच्च विद्यालयों को प्लस टू में उत्क्रमित किया गया है। इन उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालयों में भी यह व्यवस्था लागू होगी।
विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
शिक्षा विभाग की इस पहल से विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। उनकी कक्षाएं खाली नहीं जाएंगी। साथ ही विद्यालयों में उनका अनावश्यक समय बर्बाद नहीं होगा। शिक्षकों द्वारा कक्षाएं लेने से बच्चे ठीक से पढ़ाई करेंगे। इससे शिक्षा में गुणात्मक सुधार की संभावना है।
ये शिक्षक होंगे उच्च योग्यताधारी प्लस टू उच्च विद्यालयों में पढ़ाने के लिए उच्च योग्यताधारी शिक्षकों की श्रेणी में वे शिक्षक आएंगे, जो स्नातकोत्तर के साथ बीएड हैं। स्नातकोत्तर के साथ बीएड की योग्यता रखनेवाले शिक्षक ही प्लस टू विद्यालयों में पढ़ा सकते हैं। स्नातक व बीएड की योग्यता रखने वाले शिक्षक उच्च विद्यालयों में पढ़ाने के लिए योग्य होते हैं।
आदेश का अनुपालन होने पर बनेगी बात
विभाग के आदेश का अनुपालन होने से विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा और शिक्षा में सुधार हो सकेरी। अक्सर विद्यालयों में आदेश का अनुपालन ही नहीं होता। इस कारण विद्यालयों में कक्षाएं नहीं ली जातीं। इसका असर परीक्षा परिणाम पर पड़ता है।
'शिक्षकों की कमी को देखते हुए जहां प्लस टू के शिक्षक नहीं हैं, वहां उच्च विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा पढ़ावाने का निर्णय लिया गया है। उच्च योग्यताधारी शिक्षक ही ऊपरी कक्षाओं में पढ़ाएंगे। इसके लिए उच्च व प्लस टू उच्च विद्यालय के प्राचार्यो को निर्देश दे दिया गया है।'
- रतन कुमार महावर, जिला शिक्षा पदाधिकारी
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'शिक्षकों का अभाव है। सरकार ने उच्च विद्यालय के उच्च योग्यताधारी शिक्षकों द्वारा प्लस टू उच्च विद्यालयों और प्लस टू के शिक्षकों द्वारा नौवीं व दसवीं के विद्यार्थियों को पढ़वाने का फैसला किया है। यह व्यवस्था कारगर होगी।'
-परितोष चौधरी, सचिव, झारखंड प्लस टू शिक्षक संघ, रांची
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Jagran
जिलास्तर पर इसका कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। शिक्षकों की कमी को देखते हुए उच्च विद्यालयों के योग्यताधारी शिक्षकों को प्लस टू उच्च विद्यालयों के विद्यार्थियों को पढ़ाने का निर्देश दिया गया है। उच्च योग्यता वाले ये शिक्षक 11वीं व 12वीं की कक्षाएं भी लेंगे। साथ ही प्लस टू उच्च विद्यालय के शिक्षक उच्च विद्यालयों की नौवीं व दसवीं की कक्षाएं लेंगे। यह नियम सभी उच्च व प्लस टू विद्यालयों के लिए लागू होगा।
जिले में 40 प्लस टू स्कूल
वर्तमान में यह व्यवस्था वहां की जा रही है, जहां उच्च व प्लस टू विद्यालय साथ-साथ संचालित होते हों। ऐसे प्लस टू उच्च विद्यालयों की संख्या जिले में 40 है। वर्तमान समय 17 उच्च विद्यालयों को प्लस टू में उत्क्रमित किया गया है। इन उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालयों में भी यह व्यवस्था लागू होगी।
विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ
शिक्षा विभाग की इस पहल से विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा। उनकी कक्षाएं खाली नहीं जाएंगी। साथ ही विद्यालयों में उनका अनावश्यक समय बर्बाद नहीं होगा। शिक्षकों द्वारा कक्षाएं लेने से बच्चे ठीक से पढ़ाई करेंगे। इससे शिक्षा में गुणात्मक सुधार की संभावना है।
ये शिक्षक होंगे उच्च योग्यताधारी प्लस टू उच्च विद्यालयों में पढ़ाने के लिए उच्च योग्यताधारी शिक्षकों की श्रेणी में वे शिक्षक आएंगे, जो स्नातकोत्तर के साथ बीएड हैं। स्नातकोत्तर के साथ बीएड की योग्यता रखनेवाले शिक्षक ही प्लस टू विद्यालयों में पढ़ा सकते हैं। स्नातक व बीएड की योग्यता रखने वाले शिक्षक उच्च विद्यालयों में पढ़ाने के लिए योग्य होते हैं।
आदेश का अनुपालन होने पर बनेगी बात
विभाग के आदेश का अनुपालन होने से विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा और शिक्षा में सुधार हो सकेरी। अक्सर विद्यालयों में आदेश का अनुपालन ही नहीं होता। इस कारण विद्यालयों में कक्षाएं नहीं ली जातीं। इसका असर परीक्षा परिणाम पर पड़ता है।
'शिक्षकों की कमी को देखते हुए जहां प्लस टू के शिक्षक नहीं हैं, वहां उच्च विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा पढ़ावाने का निर्णय लिया गया है। उच्च योग्यताधारी शिक्षक ही ऊपरी कक्षाओं में पढ़ाएंगे। इसके लिए उच्च व प्लस टू उच्च विद्यालय के प्राचार्यो को निर्देश दे दिया गया है।'
- रतन कुमार महावर, जिला शिक्षा पदाधिकारी
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'शिक्षकों का अभाव है। सरकार ने उच्च विद्यालय के उच्च योग्यताधारी शिक्षकों द्वारा प्लस टू उच्च विद्यालयों और प्लस टू के शिक्षकों द्वारा नौवीं व दसवीं के विद्यार्थियों को पढ़वाने का फैसला किया है। यह व्यवस्था कारगर होगी।'
-परितोष चौधरी, सचिव, झारखंड प्लस टू शिक्षक संघ, रांची