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राज्य के 2000 शिक्षकों की सैलरी पर संकट, सरकार से एक सप्ताह का मांग समय

रांची।राज्य के 125 वित्तरहित शिक्षण संस्थान इस बार अनुदान के लिए ऑन लाइन आवेदन जमा नहीं कर सके है। इसमें इंटर कॉलेज, हाई स्कूल मदरसा और संस्कृत विद्यालय शामिल है। शिक्षा विभाग ने पहली बार यह व्यवस्था शुरू की थी, कि अब अनुदान के लिए ऑन आवेदन ही कॉलेजों को जमा करने होंगे। लेकिन तकनीकी रूप से सुदृढ़ और कागजात की कमी की वजह से शिक्षण संस्थान समय पर आवेदन देने की प्रक्रिया को पूरा नहीं कर सके। वित्त रहित शिक्षण संस्थानों को ऑन लाइन आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 16 नवंबर तय की गई थी।

अब शिक्षण संस्थानों को यह चिंता सताने लगी है कि अगर उनके संस्थान का आवेदन विभाग के पास नहीं जाता है तो वे अनुदान से वंचित हो जाएंगे और उनके संस्थान में पढ़ाने वाले करीब 2000 शिक्षकों को सैलरी कहां से दी जाएगी। इसके लिए सोमवार को झारखंड इंटर कॉलेज शिक्षक संघ (जिक्टा) के प्रधान सचिव सुनील कुमार सिन्हा ने शिक्षा सचिव आराधना पटनायक से मुलाकात की और शिक्षण संस्थानों को अनुदान के लिए आवेदन ऑन लाइन जमा करने की तिथि बढ़ाने की मांग की है।
आधार और अपलोड में एरर की वजह से हुई देरी
वित्त रहित शिक्षण संस्थानों का कहना है कि पहले शुरू ऑन लाइन व्यवस्था में कई ऐसी जानकारी मांगी गई थी जिसे संस्थानों के लिए उपलब्ध कराना काफी मुश्किल था। वित्त रहित संस्थानों के गवर्निंग बॉडी में जितने लोग है सभी के आधार कार्ड की कापी मांगी गई थी। जिसमें एसडीओ, आरडीडीई और जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) का भी आधार कार्ड शामिल है। वहीं कई जगहों में अपलोड करने में आए एरर की वजह से भी आवेदन समय पर जमा नहीं हो सका।
जिक्टा ने सरकार से एक सप्ताह का समय मांगा
जिक्टा की ओर से शिक्षा सचिव से एक सप्ताह और समय देने की अपील गई है। संघ की ओर से कहा गया है कि 125 शिक्षण संस्थानों में करीब 2000 शिक्षक 1.25 लाख छात्रों को पढ़ाते है। ऐसे में उनका अनुदान अगर रुकता है तो शिक्षकों में निराशा होगी। इस संबंध में शिक्षा सचिव आराधना पटनायक ने कहा कि है वे मामले को देख रही है। आवश्यकता अनुसार विभाग कार्रवाई करेगा।

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