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सख्त सरकार, हड़ताली भी झुकने को नहीं तैयार

रांची : पारा शिक्षक, बीआरपी-सीआरपी, परियोजना कर्मियों तथा कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका की शिक्षिकाओं व कर्मियों को काम पर वापस लौटने की राज्य सरकार की हिदायत का कोई असर नहीं पड़ा है। शनिवार को सरकार द्वारा उनको काम पर लौटने के दिए गए अल्टीमेटम के बाद शिक्षकों-कर्मियों ने सोमवार को अलग-अलग बैठक कर हड़ताल से वापस नहीं लौटने का दो टूक जवाब दिया।
साथ ही अपने आंदोलन को और उग्र बनाने की बात कही।
कस्तूरबा शिक्षिकाओं को सोमवार को ही काम पर लौटने का अल्टीमेटम दिया गया था। उन्होंने हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने के बजाय सोमवार से ही राजभवन के समक्ष भूख-हड़ताल शुरू कर दी। वहीं, पारा शिक्षकों ने विधायकों के आवास का घेराव किया। परियोजना कर्मियों का भी धरना जारी है। इन सभी हड़तालियों को काम पर लौटने की मियाद तय करते हुए अल्टीमेटम दे चुकी राज्य सरकार ने सख्ती और तेज कर दी है। सोमवार को शाम में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की सचिव आराधना पटनायक तथा राज्य परियोजना निदेशक मुकेश कुमार ने सभी जिला शिक्षा अधीक्षकों के साथ वीडियो-कान्फ्रेंसिंग कर हड़ताल की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने निर्धारित तिथि तक काम पर वापस नहीं लौटनेवाले हड़तालियों को अगले दिन से स्पष्टीकरण लेकर नौकरी से हटाने तथा उनकी जगह पर वैकल्पिक व्यवस्था करने के पूर्व के निर्देश का सख्त अनुपालन करने को कहा। साथ ही 'नो वर्क नो पे' के सिद्धांत का भी सख्ती से पालन करने को कहा। जबरन स्कूल बंद करानेवालों पर कानूनी कार्रवाई भी करने का निर्देश दिया।

जिलों से मिले फीडबैक के आधार पर सचिव ने कहा कि कस्तूरबा स्कूलों में हड़ताल का कोई असर नहीं है। रांची या आसपास के कुछ स्कूलों की शिक्षिकाएं ही हड़ताल पर हैं, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तहत स्थायी महिला शिक्षिका प्रतिनियुक्त की गई हैं। 70 हजार पारा शिक्षकों में भी पंद्रह-सोलह हजार ही हड़ताल पर हैं। अल्टीमेटम के बाद ये पारा शिक्षक काम पर लौट भी रहे हैं। 

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