जागरण संवाददाता, जमशेदपुर : कोल्हान विश्वविद्यालय के अलग-अलग कॉलेजों
में वर्ष 2009 के बाद शोध करने वाले दर्जनों शिक्षकों की पीएचडी की उपाधि
अवैध तरीके से हासिल की गई। आरोप है कि इन शिक्षकों ने पीएचडी करने के लिए
निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया।
छात्र आजसू की ओर से मामले की जांच की
मांग करते हुए कहा गया है कि संबंधित शिक्षकों को पीएचडी के बदले लाभ देने
से पूर्व विश्वविद्यालय सुनिश्चित करे कि शिक्षकों ने पीएचडी के लिए पूरी
प्रक्रिया का पालन करते हुए संबंधित उपाधियां प्राप्त की हैं। पिछले पांच
माह से मामले की जांच की मांग कर रहे छात्र आजसू के नेता हेमंत पाठक ने
बुधवार को एक बार फिर अपनी माग विवि के समक्ष रखी। इसमें कहा गया कि विवि
जाच कराये कि पीएचडी धारी शिक्षकों ने अपना शोध करने के लिए विवि से अवकाश
लिया अथवा नहीं।
दरअसल छात्र संगठन का आरोप है कि विश्वविद्यालय के बीएड संवर्ग के
अंतर्गत सेवा देने वाले एक प्राइवेट शिक्षक ने विवि के स्थाई शिक्षकों से
लाखों रुपये की वसूली कर करीब दर्जन भर लोगों को पीएचडी की डिग्री बिहार के
एक विवि से दिलवायी है। इस पूरी प्रक्रिया में संबंधित शिक्षकों ने विवि
को जरूरी जानकारिया नहीं दी हैं। अवकाश तक नहीं लिए हैं। छात्र संघ पिछले
पाच माह से इस मामले की जाच की मांग कर रहा है।
हाल ही में विश्वविद्यालय की ओर से पीएचडी से जुड़े मामले की भारी-भरकम
रिपोर्ट पेश होने के बाद छात्र आजसू ने एक बार फिर शिक्षकों की उपाधि की
जाच की माग तेज करते हुए पीएचडी घोटाले के साथ ही शिक्षकों की उपाधि की जाच
कराने की माग की है। इस संबंध में पूछे जाने पर कोल्हान विश्वविद्यालय की
कुलपति डॉ. शुक्ला माहाती ने कहा कि विवि का रवैया सबके लिए एक समान है।
अगर शिकायत के पर्याप्त आधार मिलते हैं तो विवि निश्चित रूप से इस मामले
में आवश्यक कार्रवाई करेगा।