जागरण संवाददाता, धनबाद: 2015 में तत्कालीन डीएसई बांके बिहारी सिंह के
समय प्रारंभिक विद्यालयों हुई शिक्षक नियुक्ति में बरती गई अनियमितता एवं
फर्जी प्रमाणपत्र की हुई जांच पर झारखंड राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने सवाल
उठा दिया है।
मुख्यमंत्री को दिए पत्र में संघ के अध्यक्ष नीलकंठ मंडल ने कहा है कि
नियुक्ति की जांच के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के संयुक्त सचिव
देवेंद्र भूषण सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई।
समिति ने कई बिंदुओं पर गहनता से जांच नहीं की। जांच समिति ने उपायुक्त एवं
डीईओ धनबाद की जांच रिपोर्ट को भी झुठला दिया। ऐसा प्रतीत होता है कि
पूर्व डीएसई को कई बिंदुओं पर आरोप मुक्त करने का प्रयास किया गया है।
बांके बिहारी सिंह इस समय जमशेदपुर के डीएसई हैं। जांच रिपोर्ट में खामियां
बताते हुए जांच प्रतिवेदन की समीक्षा कर तत्कालीन डीएसई बांके बिहारी सिंह
पर कार्रवाई की मांग की है।
जांच रिपोर्ट में खामियां
- नियुक्ति के पूर्व ही प्रमाणपत्रों की जांच का निर्देश दिया गया था।
फर्जी प्रमाणपत्र प्रतीत होनेवाले अभ्यर्थियों एवं फर्जी गिरोह पर कानूनी
कार्रवाई की बात कही गई थी। गहनता से जांच के बाद भी 150 शिक्षकों की फर्जी
नियुक्ति हो गई।
- शिक्षकों की नियुक्ति हेतु काउंसिलिंग में 16 सितंबर 2015, 28
अक्टूबर 2015, 12 नवंबर 2015 और 25 नवंबर 2015 को कई अभ्यर्थी पकड़े गए। इन
पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
- जांच समिति ने यह ध्यान नहीं दिया कि सोनी कुमारी द्वारा प्रस्तुत
मैट्रिक के अलावा इंटर 14 वर्ष एवं 17 वर्ष में प्रशिक्षण कैसे प्राप्त कर
लिया। जबकि प्रशिक्षण में नामांकन के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए।
क्या सोनी का इंटर एवं प्रशिक्षण प्रमाणपत्र भी फर्जी है, सत्यापन में क्या
पाया गया?
- इंटर में 40 फीसद से कम एवं देवघर विद्यापीठ से स्नातक डिग्री पर
नियुक्ति हुई, जबकि सरकार की ओर से इसकी मान्यता खत्म कर दी गई है। बिना
मान्यता वाले संस्थान की डिग्री पर कैसे नियुक्ति की गई।
- काउंसिलिंग में पकड़े गए अभ्यर्थियों को छोड़ दिया गया। जांच प्रतिवेदन
में 2016 में पकड़ गए अभ्यर्थियों का उल्लेख है, लेकिन 2015 में पकड़े गए
अभ्यर्थियों का दो बार ही जिक्र है जबकि चार बार पकड़े गए थे।
- नर्सरी टीचर ट्रेनिंग पर की गई नियुक्ति।