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Ranchi News : झारखंड में पारा शिक्षकों का डेढ़ दशक पुराना संघर्ष हुआ समाप्त, नौकरी होगी परमानेंट

 रवि सिन्हा, रांची

झारखंड में सरकारी स्कूलों में कार्यरत करीब 65 हजार पारा शिक्षकों का डेढ़ दशक पुराना संघर्ष अब समाप्त हो गया है। पारा शिक्षकों की अधिकांश मांगों पर सरकार ने सहानुभूतिपूर्वक निर्णय लेते हुए समस्या के समाधान का रास्ता निकाल लिया है।

खत्म हुआ 15 साल लंबा संघर्ष
पारा शिक्षकों के लंबित मांगों पर सकारात्मक विचार किए जाने पर झारखंड राज्य प्रशिक्षित पारा शिक्षक संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को रांची स्थित झारखंड मंत्रालय में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने समस्या के समाधान के लिए मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के प्रति आभार जताया।

इन बिन्दुओं पर बनी है सहमति
पारा शिक्षकों की प्रमुख मांगों के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा पारा शिक्षकों को 60 वर्ष का सेवा स्थायीकरण करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही टेट पारा शिक्षकों के मानदेय 50प्रतिशत तथा नन टेट पारा शिक्षकों को 40प्रतिशत वृद्धि का भी निर्णय लिया गया है। साथ ही आकलन परीक्षा पास करने के बाद 10 प्रतिशत मानदेय वृद्धि बोनस के रूप में करने और प्रतिवर्ष 4 प्रतिशत के वेतन बढ़ोतरी पर सहमति बनी है। पारा शिक्षकों का नाम अब सहायक अध्यापक किए जाने के निर्णय के साथ-साथ केंद्र सरकार द्वारा मानदेय भुगतान के लिए फंड नही दिए जाने पर भी राज्य सरकार के योजना मद से नियमित मानदेय भुगतान किए जाने का निर्णय लिया गया है।
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विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद पहली बार विक्ट्री साइन के साथ हेमंत सोरेन
वर्ष 2019 के दिसंबर में झारखंड विधानसभा चुनाव के बाद पहली बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन विक्ट्री साइन के साथ दिखे। मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत कई वर्षों से पारा शिक्षकों के मांगों पर विचार नहीं किया जा सका था, परंतु उनकी सरकार ने पारा शिक्षकों के दर्द और समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए मांगों को लेकर एक सकारात्मक रास्ता ढूंढने का काम किया है।

आंदोलन के दौरान दर्ज केस-मुकदमें भी होंगे वापस
बैठक में तय किया गया कि 18 साल से चल रहे आंदोलन के बीच कई टीचरों पर केस-मुकदमें दर्ज हुए। इसको लेकर शिक्षा विभाग गृह विभाग से बात करेगा। ताकि केस-मुकदमें वापस हो सकें। इससे पहले शिक्षामंत्री जगरनाथ महतो के साथ पारा शिक्षकों के शिष्टमंडल की हुई बैठक में एक मांग को छोड़ कर सभी मांगों को मान लिया गया है।इसके तहत पारा टीचरों का एक नियमवाली भी तैयार होगी। अब पारा टीचर बिहार के तर्ज पर नियोजित शिक्षक (सहायक अध्यापक) के रूप में जाने जाएंगे। वेतनमान पर केवल निर्णय सरकार लेगी। बाकी सभी मांगे पारा टीचरों की पूरी हो गयी है। सरकार के इस निर्णय से राज्य के करीब 65 हजार टीचरों को सीधा फायदा होगा।

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